भोपालमध्यप्रदेश

पांच साल से सातवें वेतनमान को तरस रहे प्रोफेसर मंत्री सिंधिया के पुतला का करेंगे मुंह काला कर जलाएंगे

भोपाल
15 साल से छठवें वेतनमान में सेवाएं दे रहे टेक्नीकल प्रोफेसर तकनीकी शिक्षा विभाग में कार्यरत करीब 1700 प्रोफेसर और लेक्चरार को को सातवां वेतनमान नहीं दिया गया है। जबकि प्रदेश का कोई भी विभाग, मंडल, निगम और आयोग नहीं बचा। जहां उसे लागू नहीं किया गया है। इसके बाद भी तकनीकी शिक्षा विभाग अपने प्रोफेसरों को सातवां वेतनमान देने को तैयार नहीं हैं। विभागीय उदासीनता देख प्रोफेसर और लेक्चरर ने विरोध करने की रणनीति तैयार कर ली है। इसके चलते मंत्री सिंधिया का घिराव किया जाएगा। यहां तक प्रदेश के प्रमुख चौराहों पर उनके पुतले फूंके जाएंगे।

प्रदेश में 70 पालीटेक्निक, सात इंजीनिरिंग कालेज और राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में करीब 1700 प्रोफेसर और लेक्चरर कार्यरत हैं। उन्हें पांच साल पहले लागू किए गए सातवां वेतनमान से वंचित रखा गया है। इन पांच सालों में विभाग में दो मंत्री बदले जा चुके हैं और तीसरे मंत्री पदासीन बनी हुई हैं। मंत्री तकनीकी शिक्षा विभाग को छोटा मानकर ज्यादा तवज्जो नहीं देते हैं, जिसके कारण उनकी हालात काफी चलर बने हुए हैं। 2016 में राज्यमंत्री दीपक जोशी के पास तकनीकी शिक्षा के साथ कौशल विकास विभाग तक था। 2018 में भाजपा सरकार के जाने के बाद कांग्रेस सरकार ने पैर जमाए। कांग्रेस सरकार ने गृहमंत्री बाला बच्चन को तकनीकी विभाग दे दिया। मार्च 2020 में भाजपा सरकार की वापसी पर खेल युवा कल्याण मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया को तकनीकी शिक्षा सौंपी गयी है। वे भी अभी तक विभाग में सातवां वेतनमान लागू नहीं कर सकी हैं।

मंत्रालय से मिली जानकारी के मुताबिक सातवां वेतनमान लागू करने के संचालनालय से प्रस्ताव आता है, तो प्रमुख सचिव की टेबिल चर्चा मात्र होती है। इसके बाद फाइल को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। गत वर्ष तत्कालीन प्रमुख सचिव प्रमोद अग्रवाल तक फाइल भेजी गई थी। इसके बाद मंत्री बाला बच्चन ने फाइल पर कोई खासा असर नहीं दिखा सके हैं। अब वेतानमान लागू करने का दायित्व प्रमुख सचिव केरोलीन खोंगवार देखमुख और मंत्री सिंधिया पर आ चुका है, लेकिन पीएस देशमुख और मंत्री सिंधिया भी उसे लागू करने में ज्यादा रूचि नहीं दिखा रही हैं।

इंजीनियरिंग, पालीटेक्निक और आरजीपीवी में पढाने वाले प्रोफेसर और लेक्चरर को पांच साल से सातवां वेतनमान नहीं दिया गया है। वे करीब 15 साल से छठवें वेतनमान लेकर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। जबकि एआईसीटीई ने उन्हें सातवां वेतनमान देने की स्वीकृति तक प्रदान कर चुका है। यहां तक मप्र राजपत्रित अधिकारी संघ ने वेतनमान लेने के लिए मुख्यमंत्री, विभागीय मंत्री और प्रमुख सचिव को ज्ञापन सौंप चुके हैं। किन्हीं ने उनकी ज्ञापन को तवज्जो नहीं दी है। इसके चलते संघ ने विरोध करने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके चलते मंत्री सिंधिया को विरोध किया जाएगा। उनके पुतले के चेहरे पर कालिक पोतकर जलाया जाएगा। इस प्रकार का विरोध प्रदर्शन इंजीनियरिंग और पालीटेक्निक का संचालन करने वाले जिलों के प्रमुख चौराहों पर किया जाएगा। यहां तक उच्च शिक्षा विभााग के कई संगठन उनके विरोध प्रदर्शन में पूर्ण सहयोग करेंगे।

नहीं होने देंगे अधिकारों का हनन
प्रदेश में 70 पालीटेक्निक, सात इंजीनिरिंग कालेज और राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में करीब 1700 प्रोफेसर और लेक्चरर कार्यरत हैं। छोटा विभाग होने के कारण मंत्री और प्रमुख सचिव का विरोध नहीं होगा। इसलिए उन्हें वेतनमान नहीं दिया गया है। प्रोफेसरों ने विरोध करने का निर्णय लिया है। उनका तर्क है कि छोटा होने के कारण हमारे अधिकारों का हनन नहीं होने देंगे।

Tags

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Close