विदेश

अपना हाल याद दिलाकर बोला अफगानिस्तान, ‘ऐसी घटनाएं शांति और स्थिरता के हक में नहीं’

काबुल
भारत और चीन के बीच लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर हुई हिंसक झड़प को लेकर अफगानिस्तान ने भी चिंता जताई है। काबुल का कहना है कि ऐसी घटना क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के हक में नहीं है। अफगानिस्तान सरकार ने इस घटना में हुए आर्थिक नुकसान और शहीदों के प्रति संवेदना जताई है और उम्मीद की है कि दोनों क्षेत्रीय और वैश्विक ताकतें अपने मतभेद को बातचीत और पड़ोसियों से अच्छे संबंधों की मदद से सुलझा लेंगी। अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा है, 'एक ऐसे देश के नाते जिसने टकराव के कारण बहुत जानों और वित्तीय नुकसान उठाया है और चीन और भारत से अपने दोस्ताना रिश्तों के कारण, ऐतिहासक संबंधों और पार्टनरशिप के चलते, अफगानिस्तान को अपने शांति और विकास के सहयोगी दोनों देशों के बीच सीमा पर हुई घटना को लेकर चिंता है। ऐसी घटनाओं के नतीजे क्षेत्रीय और वैश्विक शांति और स्थिरता के हित में नहीं हैं।'

नेपाल ने भी जताई शांतिपूर्ण हल की उम्मीद
नेपाल को भरोसा जताया है कि भारत और चीन पड़ोसियों का धर्म निभाते हुए अपने मतभेद शांतिपूर्ण तरीके से सुलझा लेंगे जिससे द्विपीक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक शांति और स्थिरता कायम हो सकेगी। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा है, 'नेपाल का मानना है कि देशों के बीच में विवाद शांतिपूर्ण तरीके से सुलझने चाहिए। नेपाल हमेशा मजबूती से क्षेत्रीय और वैश्विक शांति के लिए खड़ा रहा है।

भारत के 20 जवान शहीद
बता दें कि 25-16 जून की रात पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में भारत और चीन के जवानों के बीच हिंसक संघर्ष हो गया था जिसमें भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे। चीन की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई लेकिन 43 लगों के हताहत होने की खबरें आई थीं। चीन ने बाद में न सिर्फ घटना की जनकारी होने से इनकार किया था बल्कि यह तक आरोप लगाया कि भारत की सेना ने चीन की कीमा में कदम रखा था।

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