छत्तीसगढ़

आत्म संपत्ति की प्राप्ति का हेतु है पुरूषार्थ: साध्वी चंदनबालाश्री

रायपुर
भैरव सोसायटी पचपेड़ी नाका स्थित नाकोड़ा भैरव भवन में चल रहे चातुर्मास में धर्मसभा में साध्वी चंदनबाला श्रीजी महाराज साहब ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि हमारी आत्मा परमात्म दशा को कैसे प्राप्त करे, हम सब इस चिंतन की धरातल पर बढ़ते हैं तो मूल कारण हमें यह ज्ञात होता है कि प्रात: से रात्रि तक परिश्रम तो रहा है, किन्तु पुरूषार्थ नहीं। परिश्रम संसार वृद्धि का कारण है तो पुरूषार्थ आत्म-संपत्ति की प्राप्ति का हेतु है। लॉटरी की टिकिट खरीदे बिना लॉटरी कैसे खुलेगी। वैसे ही सम्यकत्व रूपी लॉटरी की टिकिट बिना परमात्म तत्व की प्राप्ति असंभव है।

साध्वीने कहा कि परिचय तो इस जीव ने चींटी से हाथी तक हर भव में किया, लेकिन धन और धरती का, रूप और रूपैया का, पुत्र और परिवार का परिचय किया किन्तु आत्मा का…। देवचंद्रजी महाराज ने बहुत सुंदर आत्म स्वरूप का बोध करवाया है, आज कुलगत केसरी लहेरे, निज पद सिंह निहाल… बकरियों के टोले की भांति हमारी आत्मा भी पांच इंद्रियों के टोले में फंसी हुई है, गुलाम बन गई है। शेर की बच्चे की भांति परमात्म स्वरूप से हमें आत्म स्वरूप की प्रतीती करना है। परमात्मा से केवल तीन चीजें मांगना है- आरोग्य, बोधिलाभ और श्रेष्ठ समाधि। शरीर की थोड़ी-सी बीमारी भी हमें समझ में आती है, किन्तु आत्मा पर राग-द्वेष, कषाय, मिथ्यात्व, अविरति, प्रमाद, योग की कितनी बीमारियां लगी हुई हैं, कभी विचार किया? हर भव में याचना तो की है, किन्तु प्रार्थना तो इसी भव में संभव है।

उन्होंने कहा कि इस संसार में आत्मोत्थान का मार्ग है परमात्म भक्ति। प्रभु के मंदिर में प्रवेश करने का जैसे क्रम है, सीढि?ों से रंगमंडप में और रंगमंडप से गर्भगृह में, वैसे ही अशुभ में से शुभ में और शुभ में से शुद्ध में, परमात्मा बनने का यही क्रम है। ज्ञान शून्य क्रिया भव से मुक्त नहीं करा सकती और पुरूषार्थ के अभाव में आत्म वैभव की प्राप्ति नहीं कर सकते। अनंतकाल की भवयात्रा में पाप का सृजन किया, अब मुझे पाप का विसर्जन करना है। अर्थी उठने से पहले जीवन के अर्थ को समझ लें, वरन् जीवन व्यर्थ चला जाएगा। पुरूषार्थ करने से निश्चित रूप से परमात्मा मिलेंगे। विचक्षण ज्योति, प्रज्ञाभारती साध्वी चन्द्रप्रभाश्रीजी महाराज साहब की विदुषी शिष्याएं साध्वी विजयप्रभाश्रीजी (गुरुभगिनी) एवं प्रखर व्याख्यात्री चंदनबालाश्रीजी सहित साध्वीवृंदों का चातुर्मास चल रहा है।  फिजिकल डिस्टेंसिंग व सभी शासकीय नियमों का  पालन किया गया।

सूत्र वोहराने व ज्ञान पूजा का मिला पुण्य लाभ
श्रीनाकोड़ा भैरव जैन श्वेताम्बर चातुर्मास समिति के कोषाध्यक्ष नीलेश गोलछा  व सुश्रावक जितेंद्र गोलछा ने बताया कि प्रवचनोपरांत धर्मसभा में सौभाग्यशाली परिवारों को पूज्य साध्वीवर्या को जैन धर्म सूत्र वोहराने और पांच ज्ञान की पूजा कराने का लाभ प्राप्त हुआ. यह जिन आगम पंचमी को वोहराया जाएगा, जिस पर पूरे चातुर्मास काल में व्याख्यान व जिनवाणी प्रवचन चलेगा।

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