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आपातकाल नहीं है लॉकडाउन,आरोपी को जमानत मिलना उसका अधिकार- SC

नई दिल्ली
कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुए केंद्र सरकार ने 24 मार्च को पूरे देश में लॉकडाउन की घोषणा की थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस बारे में टिप्पणी करते हुए कहा कि कोरोना महामारी के कारण आपातकाल की घोषणा की तुलना आपातकाल से नहीं की जा सकती। साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि निर्धारित समय के भीतर चार्जशीट न जमा करने पर आरोपी को जमानत का पूरा अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट की ये टिप्पणी तब आई कि मद्रास हाईकोर्ट ने समय पर चार्जशीट जमा न होने पर भी आरोपी को जमानत नहीं दी थी।

सुप्रीम कोर्ट ने बदला मद्रास हाईकोर्ट का फैसला
शीर्ष अदालत ने मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश का अवलोकन किया। न्यायमूर्ति अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय (Madras High Court) का विचार है कि लॉकडाउन के दौरान लगाए गए प्रतिबंधों में किसी अभियुक्त को डिफ़ॉल्ट जमानत का अधिकार नहीं दिया जाना चाहिए, भले ही आरोप पत्र धारा 167 (2) के तहत निर्धारित समय के भीतर दायर नहीं किया गया हो। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि आपातकाल के दौरान एडीएम जबलपुर मामले में दिया गया उसका फैसला प्रतिगामी था। इसके साथ ही जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस वी रामासुब्रमण्यम की पीठ ने मद्रास हाईकोर्ट के उस फैसले को पलट दिया जिसमें कहा गया था कि लॉकडाउन आपातकाल की घोषणा के समान है।

मद्रास हाईकोर्ट के फैसले से सहमत नहीं- SC
पीठ ने कहा, हम हाईकोर्ट के इस आदेश से कतई सहमत नहीं है। इस तरह की घोषणा से जीने के अधिकार और निजी स्वंतत्रता के अधिकार को निलंबित नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने एक आरोपी को जमानत देने के आदेश में यह बातें कही हैं। कोर्ट ने वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा की उस दलील को स्वीकार कर लिया कि लॉकडाउन के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट की तरफ से याचिका, सूट और अपील दायर करने की समयसीमा बढ़ाने का लिया गया निर्णय पुलिस को आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा-167 के तहत आरोप पत्र दाखिल करने पर लागू नहीं होता। पीठ ने आरोपी को तय समयसीमा (60 या 90 दिन) के भीतर चार्जशीट दायर न करने के आधार पर जमानत देने का निर्णय लिया।

अदालत ने एडीएम जबलपुर मामले के फैसले का उल्लेख किया
पीठ ने शीर्ष अदालत के आपातकाल के दौरान 1976 के अपने फैसले को प्रतिगामी करार देते हुए कहा, जीवन जीने का अधिकार और निजी स्वंतत्रता ऐसी घोषणाओं के दौरान भी कानून की नियत प्रक्रिया के बिना छीने नहीं जा सकते। अदालत ने एडीएम जबलपुर मामले के फैसले का उल्लेख किया जिसमें बेंच ने बहुमत ने माना था कि अनुच्छेद- 352 के तहत आपातकाल घोषित होने पर अनुच्छेद 21 के तहत मिले अधिकार लागू करने के लिए कार्यवाही नहीं की जा सकती।

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