बिज़नेस

आम्रपाली प्रोजेक्ट को लेकर SC का बड़ा फैसला

नई दिल्ली
आम्रपाली मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ईडी ने जेपी मॉर्गन की 187 करोड़ रुपये जो जब्त किए हैं वह आम्रपाली प्रोजेक्ट के लिए खोले गए यूको बैंक अकाउंट में ट्रांसफर किए जाएं ताकि उस पैसे का इस्तेमाल आम्रपाली प्रोजेक्ट के लिए हो सके।

सुप्रीम कोर्ट में आम्रपाली मामले में विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये मामले की सुनवाई हुई। बॉयर्स के वकील एमएल लाहोटी ने बताया कि मामले की सुनवाई के दौरान जेपी मॉर्गन की ओर से कहा गया कि उनकी संपत्ति जो ईडी ने अटैच किया है उसे ट्रांसफर न किया जाए। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ईडी के पास वो रुपये रखने से कोई मकसद हल नहीं होता लिहाजा उस रकम को सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में खुले अकाउंट में जमा कराया जाए और इस रकम का इस्तेमाल आम्रपाली प्रोजेक्ट के लिए होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि जेपी मॉर्गन का जो बैंक अकाउंट ईडी ने अटैच किया था उसमें रखे गए 187 करोड़ रुपये सुप्रीम कोर्ट स्थित यूको बैंक अकाउंट में ट्रांसफर किया जाए। एसबीआई कैप की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट हरीश साल्वे ने कोर्ट को बताया कि कोर्ट रिसिवर के साथ मीटिंग हुई है और सुप्रीम कोर्ट ने 500 करोड़ रुपये लोन देने का जो आग्रह किया है उस पर आगे की बातचीत होनी है। इसको लेकर एक्शन प्लान पेश किया जाएगा।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने एसबीआई से कहा था कि वह आम्रपाली प्रोजेक्ट के लिए 500 करोड़ लोन दे सकता है? लाहोटी ने बताया कि हर्टबीट प्रोजेक्ट की जमीन आम्रपाली बिल्डर ने किसी और बिल्डर को बेच दी थी जिस पर बॉयर्स की ओर से हमने एतराज जताया और कहा कि उक्त प्रोजेक्ट पर बॉयर्स का हक है और जो भी जमीन बेची गई है वह भी बॉयर्स का है। ऐसे में इस तरह की डीलिंग को निरस्त किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने अथॉरिटी से कहा है कि वह इस डीलिंग का पूरा दस्तावेज पेश करे। अगली सुनवाई 10 जुलाई को होगी।

2 दिसंबर 2019 को दिए अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने फ्लैट बॉयर्स को कहा था कि वह अपनी बकाया राशि 31 जनवरी तक जमा कराए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बकाया राशि फ्लैट बायर्स एक बार में जमा करे या किश्तों में भुगतान करे ताकि रुके हुए प्रोजेक्ट का काम तेजी से पूरा हो सके। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि फंड को चैनेलाइज्ड करने की जरूरत है ताकि पेंडिंग प्रोजेक्ट को पूरा किया जा सके।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि 3 हजार करोड़ बकाये में से 105 करोड़ रुपये बॉयर्स के आए हैं। पिछले साल 23 जुलाई को दिए आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली ग्रुप का रजिस्ट्रेशन कैंसल कर दिया था और कहा था कि आम्रपाली के पेंडिंग प्रोजेक्ट सरकारी कंपनी एनबीसीसी पूरा करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली का लीज भी कैंसल कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने एक कोर्ट रिसिवर नियुक्त कर दिया था जो ट्राई पार्टी एग्रीमेंट करेंगे और बॉयर्स को फ्लैट का पोजेशन मिले ये सुनिश्चित करेंगे। कोर्ट ने कहा था कि होम बॉयर्स अपनी बकाया राशि सुप्रीम कोर्ट स्थित यूको बैंक में जमा करें। आरोप है कि आम्रपाली बिल्डर ने बॉयर्स के हजारों करोड़ रुपये अलग-अलग कंपनियों में डायवर्ट किए हैं। फॉरेंसिक ऑडिटर की रिपोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले में ईडी जांच के आदेश दिए थे

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