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आर्थिक घुसपैठ: अब टूट सकता है भारतीय स्टार्टअप से कमाई का चीनी सपना

नई दिल्ली
दुनियाभर में निवेश के जरिए आर्थिक घुसपैठ करने वाले चीन की चाल भारत में नाकाम हो सकती है। सीमा पर बढ़ते तनाव के बाद अब सरकार द्वारा भारतीय स्टार्टअपों में चीनी निवेश की सख्त जांच करने के आसार हैं।

सरकार की सख्ती से पेटीएम, ओला, बिग बास्केट, बायजू, ड्रीम11, जोमैटो और स्विगी जैसे स्टार्टअपों पर पकड़ बढ़ा रही चीनी कंपनियों के नए निवेश पर काफी असर पड़ेगा। भारत में अलीबाबा, टेंसेंट, शाओमी और स्टीडव्यू कैपिटल जैसे कई चीनी निवेशकों ने अरबों डॉलर का निवेश कर रखा है।

पिछले कुछ वर्षों में भारत ने तो चीन को निवेश के लिए बड़ा बाजार उपलब्ध कराया, लेकिन उसने हमें सीमा पर धोखा ही दिया है। इसका नतीजा उसे निश्चित ही भुगतना पड़ेगा। हालांकि, भारतीय स्टार्टअप मालिकों को भी निवेश के नए विकल्पों पर अभी से जोर देना चाहिए।

सरकार ने चीनी आर्थिक साम्राज्यवाद को देखते हुए हाल में अपनी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नीति में बदलाव किया है। कोरोना महामारी के मददेनजर चीन द्वारा भारतीय कंपनियों के अधिग्रहण जैसी संभावना को रोकने के लिए भी सख्त कदम उठाए हैं। इसके तहत चीनी निवेश को लेकर मंजूरी पूर्व (प्री-क्लियरेंस) व्यवस्था शुरू की गई है।

फिलहाल सरकार भारत में चीन और हांगकांग के रास्ते आने वाले निवेश आवेदनों की गहन जांच कर रही है। अभी कई चीनी निवेशक सरकार से मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं।

भारतीय खुफिया एजेंसियों ने चीन से जुड़े 52 मोबाइल एप को इस्तेमाल न करने की सलाह दी है। जूम, टिकटॉक, यूसी ब्राउजर और शेयरइट शामिल।
 
चीन की बड़ी टेक कंपनियां व वेंचर कैपिटल भारत में तकनीक आधारित स्टार्टअप में निवेश के प्रमुख स्रोत बन गए हैं। वहीं, अन्य बाजारों में चीन ने भौतिक इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश कर रखा है।

चीन में सरकारी और निजी कारोबार के बीच कोई अंतर नहीं है। भारत में मीडिया, सोशल मीडिया या  फिनटेक जैसे क्षेत्रों में चीन निवेश के जरिए हमारे संवेदनशील डाटा का आसानी से दुरुपयोग कर सकता है।भारत की सख्ती और मौजूदा तनाव को लेकर चीनी वेंचर कैपिटल निवेशक चिंतित हैं। हाल ही में कुछ मामलों में उन्होंने अनुबंध शर्तें वापस भी ले ली हैं।

किस स्टार्टअप में कितना चीनी निवेश
स्टार्ट अप     निवेश*     निवेशक (*निवेश/करोड़ डॉलर)

बिग बास्केट     25     अलीबाबा, टीआर कैपिटल
बायजू      05     टेंसेंट होल्डिंग्स
देल्हीवेरी     2.5     फोसन
ड्रीम11     15     स्टीडव्यू कैपिटल, टेंसेंट होल्डिंग्स
फ्लिपकार्ट     30     स्टीडव्यू कैपिटल, टेंसेंट होल्डिंग्स
हाइक     15     टेंसेंट होल्डिंग्स फॉक्सकॉन
मेक माय ट्रिप     गुप्त     सीट्रिप
ओला      50     स्टीडव्यू कैपिटल, टेंसेंट, सेलिंग कैपिटल एंड चाइना, चीन-यूरेशियन, आर्थिक सहयोग फंड
ओयो     10     दीदी शुझिंग, चाइन लॉजिंग ग्रुप
पेटीएम मॉल      15     अलीबाबा समूह
पेटीएम.कॉम     40     अलीबाबा, सैफ पार्ट्नर्स
रिविगो     2.5     सैफ पार्ट्नर्स
स्नैपडील     70     अलीबाबा, एफटीएच मोबाइल लि.
स्विगी     50     मेतुआन डिआनपिंग हिलहाउस कैपिटल, टेंसेंट, सैफ पार्ट्नर्स
जोमैटो      20     अलीबाबा समूह
उड़ान     10     टेंसेंट होल्डिंग्स

पेटीएम, स्नैपडील, स्विगी, ओला, जोमैटो जैसी कई भारतीय यूनिकॉर्न कंपनियों में चीन ने भारी-भरकम निवेश कर रखा है। लिहाजा, उनके पास करोड़ों भारतीय यूजर्स की वाणिज्यिक और व्यक्तिगत जानकारी उपलब्ध है।

चीन दूसरे देशों की जानकारी का अपने हितों के लिए इस्तेमाल करता रहा है। वैसे तो भारतीय कानून के हिसाब से निवेशकों द्वारा हमारे डाटा के गलत इस्तेमाल का गंभीर परिणाम भुगतना पड़ सकता है। लेकिन, जानकारों का कहना है कि मौजूदा तनाव में संवेदनशील डाटा हथियाकर चीनी कंपनियां अन्य रास्तों से जवाबी कार्रवाई कर सकती हैं।

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