विदेश

आलोचना पड़ी भरी मधेसी सांसद सरिता गिरि अयोग्य घोषित

काठमांडू
नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के भारत विरोधी कार्यों के खिलाफ विरोध की आवाज उठाना जनता समाजवादी पार्टी (JSP) की सरिता गिरि को भारी पड़ा। एक दिन पहले ही पार्टी से बाहर निकाले जाने के बाद नेपाल की संसदीय सचिवालय ने मधेसी सांसद सरिता गिरि को अयोग्य घोषित कर दिया।

जनता समाजवादी पार्टी ने दी सफाई
नेपाल की जनता समाजवादी पार्टी (JSP) ने सरिता गिरि को पार्टी से बाहर निकाले जाने के सवाल पर सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने देश के नए नक्शे को लेकर पार्टी के व्हिप का उल्लंघन किया था। उन्होंने न केवल पार्टी व्हिप का उल्लंघन करते हुए संसद में नक्शे को पारित करने के प्रस्ताव का विरोध किया था बल्कि एक दूसरा प्रस्ताव पेश भी किया था।

गिरि ने कहा था, नेपाल के पास नहीं सबूत
नेपाल के राजनीतिक और प्रशासनिक नक्शे में संवैधानिक संशोधन के लिए सदन में प्रस्ताव दिया गया था जिसे 18 जून को पारित कर दिया गया था। सरिता की पार्टी नए नक्शे के समर्थन में थी जबकि गिरि ने अलग से प्रस्ताव दिया था कि पुराने नक्शे को ही मान्य रखा जाए। उनका मानना था कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि लिंपियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी नेपाल का हिस्सा हैं। हालांकि, गिरि के इस प्रस्ताव को सदन के स्पीकर अग्नि प्रसाद सपकोटा ने खारिज कर दिया।

पार्टी ने कहा- जांच के बाद किया गया फैसला
आलोचनाओं के बीच JSP ने तीन सदस्यों की टास्क फोर्स बनाकर गिरि के इस कदम की जांच का फैसला किया। इस पैनल ने अपनी रिपोर्ट में उन्हें सदन की सदस्यता और पार्टी से हटाने की सिफारिश की। जब गिरि ने सदन में अलग से प्रस्ताव दिया था, तब भी पार्टी ने कहा था, 'सरिता गिरी अपना संशोधन वापस लें नहीं तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। अगर सरिता संशोधन प्रस्‍ताव को वापस नहीं लेंगी तो वह न केवल अपना सांसद का दर्जा खो देंगी, बल्कि वह पार्टी की सदस्‍य भी नहीं रहेंगी।'

'नक्शा विधेयक के दौरान महिला का अपमान किया गया'
प्रतिनिधि सभा में नक्शा विधेयक पर जब चर्चा हुई थी त‍ब सरिता गिरी को बोलने तक नहीं दिया गया था। सदन से निकलने के बाद उन्‍होंने कहा था कि संसद के अंदर एक महिला का अपमान किया गया और उनकी आवाज को दबाने की कोशिश की गई। सांसद सरिता गिरी ने केपी शर्मा ओली सरकार को चेतावनी दी थी कि नेपाल में जो बर्ताव उनके साथ हो रहा है, उससे देश की हालत बांग्‍लादेश जैसी हो सकती है। उन्‍होंने कहा कि महिलाओं के अपमान के कारण ही बांग्‍लादेश का गठन हुआ था।

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