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इन विदेशी ब्रांड की शराब का ऑर्डर नहीं , स्वदेशी पर जोर! 

 
नई दिल्ली 

डिफेंस कैंटीन के लिए नहीं दिया गया ​विदेशी ब्रांड की शराब का ऑर्डरइस बारे में डिफेंस मंत्रालय ने कोई आधिकारिक बयान नहीं जारी किया
देश के डिफेंस कैंटीन्स में स्वेदशी ब्रांड के इस्तेमाल पर जोर शुरू हो गया है. डिफेंस कैंटीन स्टोर्स के लिए पेरनॉड रिचर्ड इंडिया और डियोजियो को विदेशी ब्रांड के शराब का ऑर्डर देना बंद कर दिया गया है. डिफेंस की कैंटीन में ये ब्रांड रियायती दरों पर बेचे जाते थे.

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है. इस कदम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'वोकल फॉर लोकल' अभियान का हिस्सा माना जा रहा है जिसमें स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देकर भारत को आत्मनिर्भर बनाने की बात कही जा रही है. गौरतलब है कि भारत के डिफेंस कैंटीन में अभी तक स्वदेशी और विदेशी दोनों तरह के उत्पाद बेचे जाते थे. शराब से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स तक के ये उत्पाद सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके परिजनों को बाजार से सस्ती दरों पर दिए जाते हैं.

 
पेरनॉड रिचर्ड इंडिया के ब्रांड में शिवास, ग्लेंलिवेट स्कॉच व्हिस्की (Chivas and Glenlivet scotch whisky) शामिल हैं. कंपनी को मई महीने के लिए आयातित स्पिरिट का कोई ऑर्डर नहीं मिला है, जबकि इसके पहले हर महीने डिफेंस कैंटीन से औसतन कंपनी को 4,500 से 5000 केस का ऑर्डर मिलता था. एक केस में 6, 9 या 12 बॉटल होते हैं.

एक सूत्र के मुताबिक डियाजियो इंडिया को भी मई महीने में आयातित ब्रांडेड शराब के लिए डिफेंस कैंटीन से कोई ऑर्डर नहीं मिला है. इसके पहले कंपनी से लोकप्रिय जॉनी वाकर ब्लैक लेबल व्हिस्की और तलिसकर सिंगल माल्ट की सप्लाई ली जाती थी.

अभी कोई आधिकारिक फैसला नहीं

इस बारे में कंपनियों या रक्षा मंत्रालय ने कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं दी है. न ही इस बारे में कोई लिखित आदेश जारी किया गया है. एक सरकारी अधिकारी ने न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को बताया, 'अभी इस बारे में कोई लिखित आदेश नहीं आया है. इसलिए इस बारे में कोई औपचारिक आदेश ही महत्वपूर्ण होगा. हम स्वदेशी उत्पादों को प्रोत्साहित करना चाहते हैं. प्रधानमंत्री के अभियान की वजह से इसकी प्राथमिकता बढ़ गई है.'
 
कितने की होती है बिक्री

गौरतलब है कि महाराष्ट्र के डिफेंस कैंटीन में एक बोतल जॉनी वाकर ब्लैक लेबल 3,600 रुपये की मिलती है, जबकि बाजार में इसकी कीमत करीब 5,500 रुपये है. इंडस्ट्री के जानकारों के मुताबिक डिफेंस कैंटीन से हर साल करीब 3500 करोड़ रुपये की शराब बेची जाती है जिनमें से आयातित शराब का हिस्सा महज करीब 129 करोड़ रुपये का ही रुपये का होता है. इन कैंटीन में ज्यादातर देश में बनी बीयर, व्हिस्की, रम और अन्य​ स्पिरिट बिकती हैं.

 

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