बिहारराज्य

उत्तर बिहार की नदियों में उतार-चढ़ाव, भारी बारिश के आसार से बाढ़ क्षेत्र में चिंता

मुजफ्फरपुर
उत्तर बिहार की नदियों के जलस्तर में लगातार उतार-चढ़ाव से बाढ़-कटाव व फसल बर्बादी का खतरा घट नहीं रहा है। इस बीच अगले दो दिनों में भारी बारिश के अलर्ट से बाढ़ क्षेत्र के लोगों की चिंता बढ़ी हुई है। वहीं, आपदा प्रबंधन व जल संसाधन विभाग की टीमों को अलर्ट मोड में रखा गया है। इधर, बुधवार को सीतामढ़ी के कटौझा में बागमती खतरे के निशान से ऊपर रही। जल संसाधन विभाग के मुताबिक सुबह से बागमती का जलस्तर कटौझा व चंदौली में बढ़ रहा है। वहीं ढेंग, सोनाखान व डुब्बाघाट में भी बागमती में धीरे-धीरे जलवृद्धि हो रही है। अधवारा समूह की नदियों का भी जलस्तर सोनबरसा, सुंदरपुर, पुपरी व बैरगनिया में बढ़ते क्रम में दर्ज किया गया। वहीं अधवारा समूह की नदियां खतरे के निशान से नीचे रहीं। इधर, मुजफ्फरपुर में बागमती और लखनदेई के जलस्तर में कमी से औराई और कटरा के लोगों को राहत मिली है। हालांकि दिन में औराई में लखनदेई के टूटे तटबंध से रिसाव होने लगा है इससे लोगों में भय बढ़ता जा रहा है। विभाग ने मुजफ्फरपुर के सिकंदरपुर में बू़ढी गंडक व जिले में बहती गंडक के जलस्ततर में बढ़ोतरी दर्ज की है। सिकंदरपुर में बूढ़ी गंडक का जलस्तर 48.91 मीटर रिकार्ड किया गया। यहां खतरे का निशान 52.53 मीटर पर है। रेवाघाट में गंडक का जलस्तर 53.07 मीटर पर रिकार्ड किया गया, यहां खतरे का निशान 54.41 मीटर पर है। समस्तीपुर में गंगा व बूढ़ी गंडक के जलस्तर में वृद्धि हो रही है लेकिन दोनों नदियां खतरे के निशान से नीचे हैं। ​

चंपारण व मिथिलांचल में नदियों के जलस्तर में  कमी ​
चंपारण में गंडक व बूढ़ी गंडक के जलस्तर में कमी आ रही है। गंडक का चटिया में जलस्तर 65.50 मीटर पर रहा, वहीं बूढ़ी गंडक नदी का लालबकेया में 69.92मीटर व लालबेगिया में 59.70 मीटर जलस्तर रिकार्ड किया गया।​ वाल्मीकिनगर बराज से बुधवार को गंडक में 1,18,000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। दरभंगा के बेनीबाद में बागमती खतरे के निशान से नीचे रही। बेनीबाद में बागमती का जलस्तर 48.56 मीटर और हायाघाट में 42.86 मीटर पर रिकार्ड किया गया। कमला सोनबरसा में खतरे के निशान से 25 सेमी नीचे बह रही है। कमला सोनबरसा में 79.18 मीटर, जयनगर में 67.35 मीटर और झंझारपुर में 49.31मीटर पर रही। ​वहीं समस्तीपुर में गंगा व बूढ़ी गंडक के जलस्तर में वृद्धि दर्ज की गई, लेकिन दोनों नदियां खतरे के निशान से नीचे ​रहीं।

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