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एक सप्ताह के लिए टली कम्युनिस्ट पार्टी की स्टैंडिंग कमिटी की बैठक, कब तक सरकार बचा पाएंगे प्रधानमंत्री केपी ओली?

नई दिल्ली 
प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली पर इस्तीफे को लेकर बढ़ते दबाव के बीच नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी की स्टैंडिंग कमिटी की बैठक को एक सप्ताह के लिए फिर टाल दिया गया है। काठमांडू और नई दिल्ली में मौजूद सूत्रों के मुताबिक, स्टैंडिंग कमिटी की बैठक को देश के अधिकतर हिस्सों में भारी बारिश, भूस्खलन और बाढ़ के हालात को वजह बताते हुए टाला गया है। लेकिन असल में ओली कुर्सी बचाने के लिए बैठक को टाल रहे हैं। समझा जाता है कि एनसीपी चेयरमैन पुष्प कमल दहल उर्फ प्रचंड कल देर रात तक बैठक टालने के खिलाफ थे, लेकिन पार्टी के टॉप नेताओं माधव नेपाल और झालानाथ खनल से मुलाकात के बाद वह इसके लिए सहमत हो गए। बैठक को ऐसे समय में टाला गया है जबकि ओली सरकार ने भारत विरोधी भावनाओं को एक बार फिर भड़काते हुए भारतीय न्यूज चैनल्स पर रोक लगा दी है। ओली सरकार ने परोक्ष रूप से भारत सरकार पर उनके खिलाफ वीडियो क्लिप तैयार कराने का आरोप लगाया है और इसके विरोध में भारतीय चैनलों को बैन कर दिया।

नेपाल मामलों के एक जानकार ने कहा, ''इन दिनों नेपाल में राजनीत बचाने का सबसे आसान तरीका हर बात के लिए भारत सरकार पर आरोप मढ़ना है। हर कोई जानता है कि प्राइवेट चैनलों में सरकार का कोई दखल नहीं है, लेकिन यह ओली के लिए बेहद आसान तरीका है, जिससे उनके ऊपर दबाव कम होता है।'' एक तरफ नेपाल भारत के खिलाफ मनगढ़त आरोप लगा रहा है, लेकिन नेपाल की घरेलू राजनीति में खुलेआम दखल दे रही चीनी राजदूत हाउ यांकी के खिलाफ एक शब्द नहीं बोला जा रहा है। बीजिंग के दिए टारगेट के आधार पर राजदूत नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं को एकजुट करने की कोशिश कर रही हैं। इसी क्रम में उन्होंने गुरुवार को एनसीपी चेयरमैन प्रचंड से मुलाकात की। माना जाता है कि कई बार अपील के बाद चीनी राजदूत दहल से मुलाकात कर पाईं।

पता चला है कि दहल ने चाइनीज राजदूत से कहा है कि वह पीएम ओली को इस्तीफे के लिए सहमत करें ताकि आने वाले समय में देश में कम्युनिस्ट शासन चल सके। उन्होंने दो टूक कह दिया कि ओली का इस्तीफा ही पार्टी में स्थिरता और चीन नेपाल संबंध बेहतर बने रहने के लिए सबसे अच्छा और आखिरी रास्ता है। चीनी राजदूत ने कहा कि बीजिंग का मुख्य उद्देश्य है कि पार्टी टूटे ना। हालांकि, नेपाल की राजनीति उस दिशा में बढ़ रही है जहां दो ही विकल्प बचते हैं, या तो ओली प्रधानमंत्री और पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा दें या फिर पार्टी का दो हिस्सों में बिखरना। नेपाल में राजनीतिक अस्थिरता के बीच चीन का भारी दबदबा या दखल स्पष्ट है, बीजिंग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से खेल कर रहा है। यह ऐसी चीज है जिसे नई दिल्ली को रोकनी चाहिए।
 

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