राजनीतिक

एमएलसी चुनाव एनडीए और महागठबंधन का कड़ा इम्तहान

पटना

बिहार में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले होने वाले विधान परिषद (एमएलसी) के चुनावों को प्रदेश की सत्ता का सेमीफाइल माना जा रहा है. विधानसभा सदस्यों के द्वारा चुनी जाने वाले एमएलसी की 9 सीटों पर 6 जुलाई को चुनाव होने हैं. इसे लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी कमर कस ली है और एमएलसी चुनाव के जरिए साल के आखिर में होने वाले विधानसभा चुनाव के समीकरण को सेट करने की कवायद में हैं.

विधान परिषद की जिन 9 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं. इनमें से 6 सीटों पर जेडीयू का कब्जा रहा है तो 3 सीटें बीजेपी के पास थीं. विधानसभा के अब बदले हुए समीकरण में बीजेपी और जेडीयू की सीटें कम होनी तय हैं. वहीं, विपक्षी आरजेडी और कांग्रेस को एमएलसी चुनाव में फायदा होता नजर आ रहा है. इसीलिए बीजेपी-जेडीयू की जोड़ी के लिए यह चुनाव अहम माना जा रहा है तो वहीं आरजेडी और कांग्रेस की दोस्ती के लिए भी असल परीक्षा होगी.

इन नेताओं का कार्यकाल पूरा

बिहार के 9 विधान परिषद सदस्यों का कार्यकाल 6 मई को पूरा हुआ था, लेकिन कोरोना संकट के चलते चुनाव को टाल दिया गया. नीतीश सरकार में मंत्री अशोक चौधरी और विधान परिषद के कार्यकारी सभापति रहे मो. हारून रसीद सहित, हीरा प्रसाद बिंद, पीके शाही, सतीश कुमार, सोनेलाल मेहता, कृष्ण कुमार सिंह, राधामोहन शर्मा और संजय प्रकाश का कार्यकाल 6 मई को पूरा हो गया है.

हालांकि, जेडीयू से लेकर आरजेडी तक कह रही है कि विधान परिषद के चुनाव को विधानसभा के चुनाव से जोड़कर नहीं देखा जा सकता. सत्ताधारी-जेडीयू और बीजेपी का मानना है कि बिहार में जो भी चुनाव होंगे उसमें एनडीए का दबदबा देखने को मिलेगा. वहीं, विपक्ष का कहना है कि बिहार की सियासत में अब किसका दबदबा दिखेगा यह तो वक्त ही बताएगा.

बिहार के एमएलसी का समीकरण

विधानसभा सदस्यों की संख्या के आधार पर विधान परिषद की 9 सीटें चुनी जानी हैं. बिहार में कुल 243 विधानसभा सदस्य हैं. इनमें एनडीए की संख्या बल के हिसाब से जेडीयू के 70, बीजेपी के 54 और एलजेपी के दो विधानसभा सदस्य हैं जबकि विपक्षी दलों में आरजेडी के 80 और कांग्रेस के 26 विधायक हैं. इसके अलावा 11 सीटें अन्य के पास हैं.

आरजेडी-कांग्रेस को फायदा, बीजेपी-जेडीयू को नुकसान

मौजूदा समीकरण के हिसाब से विधान परिषद की एक सीट के लिए 27 विधायकों की जरूरत होगी. इस तरह से तीन आरजेडी और एक कांग्रेस का विधान परिषद सदस्य चुना जाना तय है. वहीं जेडीयू एमएलसी की तीन सीटें एलजेपी और एक निर्दलीय विधायक के समर्थन से जीतने में कामयाब हो सकती है. जबकि बीजेपी अपने सदस्यों के दम पर दो सीटें जीतने में कामयाब रहेगी. इस तरह से एमएलसी चुनाव में जेडीयू को तीन और बीजेपी को एक सीट का नुकसान हो रहा है. वहीं, आरजेडी और कांग्रेस को फायदा मिलता दिख रहा है.

जेडीयू कोटे से नीतीश कुमार के मंत्री अशोक चौधरी का एक बार फिर से विधान परिषद में जाना तय माना जा रहा है. बाकी दो नए चेहरे कौन होंगे अभी तक तस्वीर साफ नहीं है. वहीं, बीजेपी इस बार विधानसभा चुनाव के समीकरण को देखते हुए नए चेहरों पर दांव लगाने की कवायद में है. ऐसे ही आरजेडी भी जातीय और क्षेत्रीय समीकरण को एमएलसी चुनाव के जरिए सेट करने की कोशिश में है.

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