छत्तीसगढ़

एसीसीएल की दीपका कोयला निकासी बेल्ट में भीषण आग, लाखों का नुकसान

कोरबा
शनिवार की सुबह एसईसीएल की दीपका खदान से कोयला निकासी के लिए बिछे कन्वेयर बेल्ट में अचानक आग लगने से लगभग 200 मीटर लंबा कन्वेयर बेल्ट जलकर पूरी तरह से राख हो गया। जानकारी मिलते ही  प्रबंधन ने तत्काल आग पर नियंत्रण पाने के लिये पानी छिड़काव कर मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया। इस अग्निकांड में  लाखों रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है। वहीं बेल्ट बंद होने से फिलहाल कोयला निकासी दूसरे बेल्ट से की जा रही है।

प्राप्त समाचारों  के अनुसार एसीसीएल की दीपका ओपन कास्ट परियोजना में खदान के अंदर से साइलो तक कोयला निकालने का काम कन्वेयर बेल्ट के माध्यम से किया जाता है। प्रतिदिन 80 हजार टन कोयला उत्पादन होने से एसईसीएल ने अलग-अलग नाम से तीन लाइन में कन्वेयर बेल्ट बिछाये गये है, जो निरंतर काम करते रहते हैं ।  शनिवार को क्यूपी वन नंबर के बेल्ट में आग लग गई और थोड़ी ही देर में बेल्ट धू-धू कर जलने लगा। बताया जा रहा है कि तेज आग निकलने पर कर्मचारियों तथा प्रबंधन को जानकारी हुई। आनन-फानन में पानी डाल कर आग पर काबू पाया गया, लेकिन तब तक 200 मीटर लंबा कन्वेयर बेल्ट जल चुका था। जानकारों का कहना है कि घटना के वक्त बेल्ट बंद था, पर उसमें कोयला भरा हुआ है। प्रबंधन ने बेल्ट बदलने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। आग क्यों व कैसे लगी, अभी स्पष्ट नहीं हो सका। मामले को छिपाने का प्रयास किया गया, पर सफलता नहीं मिल सकी। आग लगने से क्यूपी वन नंबर बेल्ट से कोयला आपूर्ति बंद हो गई है। शेष दो बेल्ट क्यूआर टू व क्यूआर थ्री चालू होने से कोयला निकासी की जा रही है।

खदान से बेल्ट से कोयला निकाल कर सीधे बेल्ट में डाल कर साइलो तक पहुंचाया जाता है और जब बेल्ट बंद करना होता है तब पूरा बेल्ट खाली कर बंद किया जाता है। बताया जा रहा है कि इस कार्य में भी लापरवाही की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता और यही लापरवाही आगजनी का कारण बनी। आगजनी के दौरान बेल्ट में कोयला भरा हुआ था। चूंकि खदान में कोयले में आग हमेशा लग रही है, इसलिए संभावना जताई जा रही है कि बारिश के कारण कोयले की ऊपर लगी राख निकल गई होगी और आग लगा कोयला बेल्ट में आ गया होगा। बेल्ट पूरा खाली नहीं होने से गर्म कोयला से बेल्ट में आग लग गई।

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