उत्तर प्रदेशराज्य

गंगा ने बढ़ाई कोरोना संकट के बीच चिंता 

 प्रयागराज 
कोरोना महामारी के बढ़ते प्रकोप को लेकर प्रयागराज वासी पहले से भयभीत हैं। मध्य जून से गंगा-यमुना का जलस्तर बढ़ने लगा है। उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मॉनसून सक्रिय होने के कारण मध्य जून से ही गंगा-यमुना में पानी बढ़ रहा है। दोनों नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है लेकिन वर्तमान में शहर के तटीय इलाकों के लिए गंगा का बढ़ना खतरनाक संकेत दे रहा है। पानी बढ़ना तेज होने पर अगस्त-सितंबर से पहले बाढ़ आ सकती है।

दोनों नदियां बढ़ती रहीं तो गंगा के तटीय इलाके जुलाई में जलमग्न हो सकते हैं। बीते वर्षों की तुलना में इस साल बैराजों से लगभग तीन गुना से अधिक पानी छोड़ा जा रहा है। नरोरा और कानपुर बैराजों से छोड़ा जा रहा बारिश के पानी का प्रभाव गंगा के कछार में दिखाई पड़ने लगा है। संगम क्षेत्र में कछार के बीच से बहने वाली गंगा में छोड़ा जा रहा अतिरिक्त पानी नागवासुकि मंदिर के सामने निचले इलाकों को भरने लगा है। एक सप्ताह से गंगा का प्रवाह तेज हुआ है।

इस बार गंगा में पहले से ही पानी अधिक था

गंगा और यमुना में इस तरह की हलचल मध्य जुलाई के बाद दिखाई पड़ती है। इस साल मध्य जून से गंगा में बढ़ते जलस्तर को लेकर सिंचाई विभाग का बाढ़ प्रखंड अभी से सक्रिय हो गया है। सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता दिनेश त्रिपाठी ने बताया कि बैराजों से छोड़ा जा रहा पानी प्रयागराज में दिखाई पड़ रहा है। सहायक अभियंता कहते हैं कि गंगा में पहले से पानी अधिक था। इस साल मॉनसून 15 जून से पहले सक्रिय होने पर बारिश हो रही है।  

चंबल घाटी की बारिश बढ़ाएगी मुश्किल

गंगा के मैदानी इलाके और उत्तराखंड में मॉनसून सक्रिय होने के साथ मध्य प्रदेश के चंबल घाटी में कुछ घंटों की बारिश प्रयागराज में मुश्किल खड़ी कर सकती है। चंबल घाटी में अधिक बारिश होने पर केन, बेतवा और चंबल हाहाकारी हो जाएंगी। तीनों नदियों का पानी यमुना के रास्ते संगम आएगा। जून के अंत तक मध्य प्रदेश के लगभग सभी हिस्से में तेज बारिश का अनुमान लगाया जा रहा है। ऐसा होगा तो जुलाई में प्रयागराज वासी कोरोना और बाढ़ के साथ दोहरी मुश्किल में होंगे। मॉनसून का रुख देख सिंचाई विभाग जून से ही केन, बेतवा और चंबल के जलस्तर पर निगरानी कर रहा है।

चरणों में बढ़ेगा संकट

गंगा-यमुना का जलस्तर बढ़ने पर शहर वासियों की मुश्किल चरणों में बढ़ेगी। गंगा का जलस्तर 81.15 मीटर पहुंचने के साथ स्लूज गेट बंद होने लगेंगे। सबसे पहले बक्शी बांध स्लूज गेट बंद होगा। इसके बाद मोरी और चाचर नाले का गेट बंद होने से एक तिहाई शहर के नालों का पानी रुक जाएगा। नालों का पानी बहाने के लिए नगर निगम, जल निगम को बड़े-बड़े पंप चलाने पड़ेंगे। 81.50 मीटर जलस्तर होने पर लगभग संपूर्ण संगम क्षेत्र जलमग्न हो जाएगा। 81.70 मीटर जलस्तर पहुंचने के साथ गंगा के तटीय मोहल्लों में पानी प्रवेश करेगा। इससे पहले निचले इलाकों को खाली कराने की कवायद शुरू हो जाएगी। निचले इलाकों में पानी घुसने से लगभग 50 हजार आबादी प्रभावित होगी।

गंगा-यमुना का जलस्तर बढ़ने पर कब क्या होगा

– गंगा का जलस्तर 81.15 मीटर जाने पर बक्शी बांध का स्लूज गेट बंद होगा। 
– यमुना का जलस्तर 83.00 मीटर पहुंचने पर चाचर नाला का गेट बंद होगा।
– संगम का जलस्तर 81.30 पहुंचने पर मोरी गेट बंद होगा।
– 81.59 मीटर होने के साथ संगम का जल बड़े हनुमान मंदिर में प्रवेश करेगा।
– 81.50 मीटर गंगा का जलस्तर होने पर कछारी इलाकों को खाली कराया जा सकता है।
– 84.73 मीटर पर बाढ़ घोषित होगा।

इस साल मॉनसून जल्द सक्रिय होने का असर
– 15 जून से गंगा के मैदानी इलाके में बारिश शुरू हो गई।
– नौ दिन में गंगा का जलस्तर 28 सेमी बढ़ा।
– नौ दिन में यमुना का जलस्तर 30 सेमी बढ़ा।

गंगा के बैराजों से छोड़ा जाने वाला पानी

बैराज      23 जून 2020                   23 जून 2019
नरोरा      24,982 क्यूसेक                11,258 क्यूसेक 
कानपुर   27,218 क्यूसेक                8,640 क्यूसेक    

23 जून को गंगा-यमुना का जलस्तर

गंगा (फाफामऊ) : 77.70 मीटर 
गंगा (छतनाग) : 72.55 मीटर 
यमुना (नैनी) : 73.12 मीटर 

क्या बोले विशेषज्ञ?
इस साल मॉनसून ठीक समय पर सक्रिय है। जुलाई के पहले सप्ताह में कश्मीर से मॉनसून सक्रिय होगा। मॉनसून अभी से सक्रिय है तो बारिश अच्छी होगी। अभी से बारिश और गंगा-यमुना में जलस्तर बढ़ने का ट्रेंड देखकर इस साल भी बाढ़ के लिए तैयार रहना चाहिए।- उमेश शर्मा, सेवानिवृत्त अधीक्षण अभियंता व नदी विशेषज्ञ

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