राजनीतिक

गोविंद राजपूत से होकर गुजरती है सुरखी की सुर्खियां!

भोपाल
बुंदेलखंड में  सागर जिले के सुरखी क्षेत्र में भी मध्य प्रदेश के 27 विधानसभा सीटों के साथ उपचुनाव होने जा रहा है। क्षेत्र से लगातार छह बार कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ चुके गोविंद सिंह राजपूत इस बार भाजपा प्रत्याशी के रूप में उपचुनाव लड़ने जा रहे हैं। वैसे भी सुरखी क्षेत्र की सारी राजनीतिक सुर्खियां राजस्व और परिवहन जैसे महत्वपूर्ण विभाग के मंत्री बनने के बाद गोविंद राजपूत से ही होकर गुजरने लगी है । ऐसी दशा में कांग्रेस को एक ऐसे प्रत्याशी की तलाश है जो इस खोई हुई सीट को उसकी झोली में फिर से डाल सके।

कांग्रेस में कई  हैं दावेदार      
क्षेत्र के चुनावी समीकरण को देखते हुए ऐसा कतई नहीं माना जा सकता कि कांग्रेस छोड़कर भाजपा में जाने के बाद गोविंद सिंह के मुकाबले कोई और दूसरा नेता नहीं है। संभवत यही कारण है कि आधा दर्जन से भी ज्यादा कांग्रेसी नेता पार्टी टिकट पाने के लिए कतार में हैं। इनमें प्रमुख रूप से कमलेश साहू ,प्रमिला सिंह, प्रहलाद पटेल ,भूपेंद्र सिंह मुहासा, विजय लोधी और नरेश जैन का नाम सामने आ रहा है। सुर्खियों में नाम तो राजेंद्र सिंह मोकलपुर का भी है जो अभी भाजपा के नेता हैं और गोविंद राजपूत से उनके मतभेद और मनभेद जग जाहिर है। कांग्रेसी नेता इस प्रयास में है कि इन्हें पार्टी में लाकर चुनाव लड़ने के लिए तैयार किया जाए। कमलेश साहू पूर्व विधायक संतोष साहू का छोटा भाई और पारुल साहू का चाचा है। क्षेत्र में इस परिवार का काफी दखल माना जाता है। प्रमिला सिंह महिला कांग्रेस की जिलाध्यक्ष है और क्षेत्र के भाजपा सांसद राजबहादुर की सगी बहन है। भूपेंद्र सिंह मुहासा एआईसीसी के सदस्य होने के साथ ही प्रदेश कांग्रेस के सचिव भी हैं ।इसी तरह प्रहलाद पटेल और विजय लोधी क्षेत्र के बड़े किसान एवं सक्रिय कांग्रेसी कार्यकर्ता हैं। जहां तक नरेश जैन की बात है वे प्रदेश कांग्रेस के कोषाध्यक्ष रह चुके हैं और वर्तमान में जिला कांग्रेस ग्रामीण के अध्यक्ष भी हैं। उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के करीबी नेताओं में शुमार किया जाता है।

दोनों ही दल सक्रिय, लगाने लगे जोर  
उपचुनाव को लेकर सरगर्मी अभी से बहुत तेज है । तेज तर्रार जनप्रतिनिधि माने जाने वाले गोविंद सिंह राजपूत ने अपना चुनावी अभियान उसी अंदाज में जोर शोर से शुरू कर दिया है। वह न सिर्फ कांग्रेस के अपने पुराने सहयोगी नेताओं और कार्यकर्ताओं को अपने नए दल में लाने का पूरा प्रयास कर रहे हैं बल्कि भाजपा में उनके आने से नाराज भाजपा कार्यकर्ताओं को भी मनाने में लगे हुए हैं। पार्टी की ओर से  इस क्षेत्र से विधायक और सांसद रह चुके मंत्री भूपेंद्र सिंह को प्रभारी बनाया गया है वह क्षेत्र में न सिर्फ समन्वय करने में जुटे हुए हैं बल्कि भाजपा कार्यकर्ताओं की लगातार बैठक भी ले रहे हैं। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस में टिकट के दावेदार भी अपने-अपने स्तर पर पार्टी कार्यकर्ताओं से संपर्क का दौर चला रहे हैं। पार्टी की ओर से पूर्व मंत्री लखन घनघोरिया और विधायक संजय शर्मा को यहां का चुनाव प्रभारी बनाया गया है । दोनों भी कई बार क्षेत्र का दौरा कर कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने का प्रयास कर चुके हैं। कांग्रेस के प्रदेश संगठन प्रभारी कुलदीप सिंह बाछल भी पूरे क्षेत्र को 7 सेक्टर में बांटकर बूथ स्तर पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं को एकजुट करने की मुहिम चला रहे हैं। क्षेत्र में बसपा और सपा का भी प्रभाव है किंतु अभी तक उनकी कोई गतिविधि शुरू नहीं हुई है।

 उलझा हुआ जाति समीकरण  
क्षेत्र का जाति समीकरण बेहद उलझा हुआ है। कोई भी दल किसी वर्ग के मतदाता को अपने पॉकेट वोट नहीं मान सकते। दो लाख से ज्यादा मतदाता वाले सुरखी में 90 हजार ओबीसी मतदाता है जिसमें कुर्मी, काछी, कुशवाहा ,यादव और तेली शामिल है। लगभग 70 हजार सवर्ण मतदाता में ठाकुर , ब्राह्मण और दांगी मतदाता शामिल है ।  इसी तरह लगभग 40-50 हजार हरिजन, आदिवासी और मुस्लिम मतदाता है। दो बार क्षेत्र में बहुत कम मतों से हार -जीत हो चुकी है ,98 में खुद गोविंद सिंह मात्र 93 वोट से भूपेंद्र सिंह को हराकर जीते थे जबकि 13 में वह मात्र 141 मतों के अंतर से पारुल साहू से चुनाव हारे थे। इससे क्षेत्र में एक-एक  वोट की अहमियत मायने रखती है। इसीलिए क्षेत्र में जातियों के समूह को साधने की पुरजोर कोशिश होती रही है।

 भाजपा के नाराज नेताओं को मनाने की कवायद    
अपने पुराने प्रतिद्वंदी गोविंद सिंह के भाजपा में आने से वर्षों से पार्टी का झंडा संभालने वाले कई भाजपा नेता नाराज चल रहे हैं, जिनको मनाने की कवायद भी तेज हो गई है। इन नेताओं में पूर्व विधायक पारुल साहू के साथ ही मोकल सिंह राजपूत और सुधीर यादव का नाम शुमार है। यह तीनों उनके चुनावी प्रतिद्वंदी रह चुके हैं।  सुधीर यादव को तो एट्रोसिटी एक्ट में जेल की हवा तक खानी पड़ी है और इसमें षड्यंत्र का आरोप वह कमलनाथ सरकार में मंत्री गोविंद राजपूत पर लगा चुके हैं। ऐसी दशा में चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा प्रत्याशी को उनका कितना साथ मिल पाएगा , इसका स्पष्ट संकेत अभी से मिलने लगा है। यह क्षेत्र कांग्रेस का गढ़ माना जाता है । ऐसी दशा में बेहतर और चुनाव जीतने की संभावना वाले प्रत्याशी देने से चुनावी मुकाबला  दिलचस्प हो सकता है।

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