छत्तीसगढ़

गौठानों में रोका-छेका अभियान को लेकर लिया गया संकल्प

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार की पहल पर आज प्रदेश के सभी जिलों के सभी गौठानों में रोका-छेका अभियान पर संकल्प लिया गया। फसल सुरक्षा के लिए रोका-छेका एक महत्वपूर्ण पहल है। फसल सुरक्षा के लिए छत्तीसगढ़ में रोका-छेका की प्रचीन परंपरा रही है।
मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल प्रदेश में इसे पुन: प्रारंभ करने के लिए सभी जिलों के कलेक्टरों के मार्गदर्शन में विशेष ग्रामसभा आयोजित की गयी। जिसमें गौठान समिति, स्व-सहायता समिति के पदाधिकारियों, चरवाहों ,त्रिस्तरीय पंचायत के जनप्रतिनिधियों की संयुक्त बैठक में बताया गया कि फसल सुरक्षा के लिए किसानों की पुरानी परंपरा रोका-छेका को पुन: प्रारंभ किया जा रहा है। फसल की सुरक्षा के लिए खेतों को लकड़ी, बाड़ से घेरने के बजाय गौठान परिसर में मवेशियों को नियंत्रित किया जायेगा। मवेशियों के अपशिष्ट से फसल के लिए उपयोगी जैविक खाद, गोबर गैस का भी उत्पादन होगा। गांवों में गठित गौठान समिति खाद, गोबर गैस, चारागाह में उत्पादित सब्जी, मसाला आदि बेचकर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनेगी।
विशेष सभा में गौठान समिति, स्व-सहायता समूह, चरवाहा ,गांव के जन प्रतिनिधियों को बताया गया कि जिलों के विभिन्न गांवों में गौठान बनाए गए हैं। जहां पशुओं को सुरक्षित रखने के लिए चारागाह, पानी, शेड आदि की व्यवस्था की गई है। गौठान के चारागाह में नेपियर घास और स्व-सहायता समूहों द्वारा सब्जी-भाजी, मसाला आदि का उत्पादन शुरू हुआ है। राज्य सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत स्व-सहायता समूहों और गौठान समितियों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। समूहों को सक्षम बनाने के लिए शासन की योजना के तहत लाभान्वित किया जाएगा।

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