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चीनी पनडुब्बियां बढ़ा सकती हैं भारत की टेंशन

पेइचिंग
अमेरिका, भारत, जापान समेत अन्‍य पड़ोसी देशों के साथ चल रहे तनाव के बीच चीन की नौसेना बहुत तेजी से अपनी वैश्विक क्षमता को बढ़ा रही है। माना जा रहा है कि साउथ चाइना सी पर 'कब्‍जा' करने के बाद चीनी नौसेना का एक बड़ा लक्ष्य हिंद महासागर हो सकता है। अगर इस क्षेत्र में चीनी पनडुब्बियां बिना किसी की नजर में आए पहुंचती हैं तो उसका खासा असर हो सकता है। इन पनडुब्बियों को जिबूती और ग्‍वादर में बन रहे चीनी नौसैनिक अड्डे से भी मदद मिल सकती है।

अमेरिकी पत्रिका फोर्ब्‍स की रिपोर्ट के मुताबिक चीन के नजरिए से देखा जाए तो यहां पनडुब्बियां तैनात करने से वह जंग के हालात में समुद्री परिवहन आसानी से जारी रख सकेगा। अगर चीन ऐसा करता है तो दुनिया के दूसरे देशों, खासकर भारत के लिए चिंता का कारण हो सकता है। फिलहाल भारत के पास दक्षिण एशिया में सबसे बड़ा पनडुब्बी बेड़ा है।

पाकिस्तान और श्रीलंका के बंदरगाहों पर चीनी सबमरीन
हाल के वक्त में चीन की सैन्य आक्रामकता को देखते हुए दुनिया उसकी नौसेनिक ताकत के विस्तार को लेकर चिंतित है। अमेरिका ने अपनी नेवी एशिया की ओर भेजना शुरू कर दिया है। हालांकि, उसका ध्यान अभी साउथ चाइना सी पर ही जबकि भारत के लिए हिंद महासागर भी एक बड़ा मुद्दा है। चीनी पनडुब्बियों ने हाल के सालों में पाकिस्तान और श्रीलंका में बंदरगाहों में मौजूदगी दर्ज कराई है। शांति के वक्त में चीनी पनडुब्बियां हिंद महासागर में स्ट्रेट ऑफ मलक्का के रास्ते दाखिल हो सकती हैं। वे अपनी उपस्थिति जाहिर करें, इसके लिए उन्हें सतह से होकर ही आना होगा।

चीन फिर भी भारत को सिर्फ संदेश देने के लिए ऐसा कर सकता है लेकिन अगर चीन अपनी उपस्थिति छिपाना चाहेगा तो उसे ऑपरेशन के दौरान काम नहीं आएगा। अभी तक ऐसा माना जाता था कि चीनी पनडुब्बियों का मलक्‍का स्‍ट्रेट से बिना नजर में आए जाना मुश्किल है लेकिन अब इसका भी तोड़ निकल आया है। दरअसल, हिंद महासागर में घुसने के लिए दो रास्‍ते हैं। पहला सुंडा स्‍ट्रेट और दूसरा लोमबोक स्‍ट्रेट।
 

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