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चीन से सटी सीमा पर 18 हजार फुट की ऊंचाई पर वायुसेना कैसे चलाती है ऑपरेशन

लेह 
भारत और चीन की सेनाओं के बीच तनातनी के बाद भले ही गलवान से चीनी सेना कुछ पीछे हटी हो, लेकिन भारतीय वायुसेना अपनी तैयारियों में कोई कमी नहीं करना चाहती है. आजतक ने दो दिन पहले एक एक्सक्लूसिव खबर चलाई था और बताया था कि किस तरह से वायुसेना चीन से लगने वाली सरहद के एक फॉरवर्ड एयरबेस पर लगातार ऑपरेशन कर रही है. वायुसेना के लड़ाकू विमान सुखोई और मिग-29 समेत कई लड़ाकू विमान दुश्मन पर नजर रखने के लिए लगातार उड़ान भर रहे हैं.

इसी तरह से वायुसेना के हेलीकॉप्टर अपाचे, चिनूक और मी-17 भी मिशन में लगे हुए हैं. आजतक की टीम इस नाइट ऑपरेशन को कवर करने के लिए रात 8:00 बजे फॉरवर्ड एयरवेज पर पहुंची. उस वक्त वायुसेना के ग्राउंड स्टाफ लड़ाकू विमानों और हेलीकॉप्टर को तैयार कर रहे थे. 15 डिग्री तापमान और तेज बर्फीली हवाओं के बीच वायुसैनिक सरहद की निगरानी के इस मिशन में जुटे हुए थे.

यहां पर तैनात सैनिकों को दोहरी चुनौती से निपटना होता है. एक तरफ बर्फीले मौसम की दुश्वारियां और दूसरी तरफ दुश्मन पर कड़ी नजर रखने की चुनौती. अपाचे हेलीकॉप्टर को नाइट ऑपरेशन पर भेजने से पहले ग्राउंड स्टाफ तैयारी करता है. उसे रिफ्यूल किया जाता है. साथ ही मिसाइल, मशीनगन, रडार और सभी मशीनों को चेक किया जाता है. इसके बाद इंजन स्टार्ट होता है और ग्राउंड स्टाफ हरी झंडी देता है, जिसके बाद रात के अंधेरे में अपाचे हेलीकॉप्टर अपनी उड़ान शुरू कर देता है.

अफगानिस्तान में US भी करता है अपाचे हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल
अपाचे हेलीकॉप्टर दुनिया का बेहतरीन लड़ाकू हेलीकॉप्टर माना जाता है और खासतौर से यह माउंटेन वॉर फेयर के लिए बहुत बेहतरीन है. अमेरिकी सेना इसका इस्तेमाल अफगानिस्तान के ऊंचे पहाड़ों में तालिबान के खिलाफ कर रही है.

बर्फीली हवाओं के बीच उड़ान भरना नहीं होता है आसान
इसी तरह वायुसेना का ट्रांसपोर्ट हेलीकॉप्टर शिनूक भी रात का ऑपरेशन शुरू करता है. फिलहाल लद्दाख में चीन से लगने वाली 1200 किलोमीटर लंबी एलएसी पर भारत के हजारों जवान तैनात हैं. ऐसे में रात के वक्त किसी भी समस्या से निपटने के लिए चिनूक हेलीकॉप्टर फॉरवर्ड एयरबेस से उड़ान भरता है और अगर जवानों को राशन हथियार की कोई भी जरूरत होती है, तो न सिर्फ दिन बल्कि रात में भी उसे पूरा करता है.
 
रात का ऑपरेशन आसान नहीं होता है. खासतौर से 12000 से लेकर 18000 की ऊंचाई पर ऑपरेशन के दौरान कई चुनौतियां होती हैं. तेज बर्फीली हवाओं के बीच उड़ान भरना आसान नहीं होता है. मौसम का मिजाज और हवाओं का रुख भी कई बार ऑपरेशन में दिक्कत पैदा करता है. एक बार उड़ान भरने पर चिनूक हेलीकॉप्टर करीब 40 मिनट तक फॉरवर्ड इलाकों में निगरानी का काम करते हैं. उसके बाद वापस एयरबेस पर लौट आते हैं.

दुश्मन के खिलाफ अचूक हथियार है नाइट ऑपरेशन
इसी तरह सुखोई और मिग 29 लड़ाकू विमान का भी नाइट ऑपरेशन होता है. भारतीय वायुसेना के बेड़े में सुखोई सबसे ताकतवर और बेहतरीन लड़ाकू विमान है. बालाकोट एयर स्ट्राइक के दौरान भी सुखोई ने नाइट ऑपरेशन के जरिए अहम भूमिका निभाई थी. मौजूदा हालात में सरहद पर सुखोई लड़ाकू विमान चीन की हर हरकत का माकूल जवाब देने के लिए तैयार हैं. वायुसेना के मुताबिक रात के ऑपरेशन में दुश्मन को चौंकाने का एक बहुत बड़ा कारण होता है. इसीलिए नाइट ऑपरेशन की बहुत अहमियत होती है. इस एयरबेस पर तैनात सीनियर पायलट ने आजतक से खास बातचीत में कहा कि नाइट ऑपरेशन दुश्मन के खिलाफ एक अचूक हथियार है.

मुश्किल हालात में वायुसैनिकों का जोश छूता है आसमान
आजतक की टीम इस फॉरवर्ड एयरबेस पर मौजूद ग्राउंड स्टाफ से बात की, जिनकी किसी भी ऑपरेशन में सबसे अहम भूमिका होती है. किसी भी लड़ाकू विमान के उड़ान भरने से पहले उसे पूरी तरह से तैयार करना, हथियारों से लैस करना और उसकी जांच करना इनके हाथ में होता है. यहां इस ऊंचाई पर बर्फीले मौसम और दुश्मन की चुनौती के बीच ये दिन-रात देश की निगरानी में जुटे हुए हैं. मुश्किल हालात में भी इनका जोश हमेशा आसमान छूता है और देश के लिए यह 24 घंटे तैनात रहते हैं.
 

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