राजनीतिक

जनसंघ के जनक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि

नई दिल्ली
भारतीय जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की आज पुण्यतिथि है. 23 जून 1953 को उनकी रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो गई थी. भाजपा इस दिन को 'बलिदान दिवस' के रूप में मनाती है. वैचारिक मतभेद के बाद भी तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को अपनी अंतरिम सरकार में मंत्री बनाया था. हालांकि उन्होंने नेहरू पर तुष्टिकरण का आरोप लगाते हुए मंत्री पद से इस्तीफा देकर जनसंघ पार्टी की स्थापना की थी.

बता दें कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म छह जुलाई 1901 को कलकत्ता के एक संभ्रांत परिवार में हुआ था. उनके पिता का नाम आशुतोष मुखर्जी था. उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन करने के बाद 1927 में बैरिस्टरी की परीक्षा पास की. भारत सरकार अधिनियम 1935 के तहत 1937 में संपन्न हुए प्रांतीय चुनावों में बंगाल में किसी भी दल को बहुमत नहीं मिला था. इसी चुनाव से ही श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने राजनीति में प्रवेश किया था, लेकिन चुनाव जीत नहीं सके. हालांकि, साल 1944 में डॉ. मुखर्जी हिंदू महासभा के अध्यक्ष बनकर अपनी सियासी पहचान बनाई.

भारत के पहले प्रधानमंत्री रहे पंडित जवाहरलाल नेहरू की डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी से कई मतभेद रहे थे. देश की आजादी के बाद 1947 में जब जवाहरलाल नेहरू देश के प्रधानमंत्री बने तो स्वयं महात्मा गांधी और सरदार पटेल ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को तत्कालीन मंत्रिपरिषद में शामिल करने की सिफारिश की थी. पंडित नेहरू ने डॉ. मुखर्जी को मंत्रिमंडल में शामिल किया और उन्हें उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी थी. यह मतभेद तब और बढ़ गए जब नेहरू और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री लियाकत अली के बीच समझौता हुआ. इसके समझौते के बाद छह अप्रैल 1950 को उन्होंने मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर-संघचालक गुरु गोलवलकर से परामर्श लेकर मुखर्जी ने 21 अक्टूबर 1951 को राष्ट्रीय जनसंघ की स्थापना की थी. इसके बाद 1951-52 के आम चुनावों में राष्ट्रीय जनसंघ के तीन सांसद चुने गए जिनमें एक डॉ. मुखर्जी भी शामिल थे. बेशक उन्हें विपक्ष के नेता का दर्जा नहीं था लेकिन वे सदन में पंडित नेहरू की नीतियों पर तीखा प्रहार करते थे.

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