भोपालमध्यप्रदेश

ताबड़तोड़ खरीद के साइट इफैक्ट, 1600 करोड़ का सरकारी धान गोदामों में अटका

भोपाल
सरकारी खजाने से राशि खर्च कर खरीदी गई सोलह सौ करोड़ की धान पर संकट के बादल मंडराने लगे है। मध्यप्रदेश के सरकारी गोदाम इस धान से पटे पड़े है और मिलर्स इस धान को मिलिंग के लिए उठाने को तैयार नहीं है।

सरकारी नियम है कि एक क्विंटल धान से मिलिंग के बाद मिलर्स को 67 क्विंटल चावल तैयार करके देना होता है। पिछले महीनों में पीडीएस की दुकानों पर खराब चावल की सप्लाई के मामले ने इतना तूल पकड़ा कि अब खाद्य विभाग फूंक-फंूक कर कदम रख रहा है। मिलर्स पर भारी दबाव है। एक क्विंटल धान से 67 किलो चावल बिना टूटन के लेना है। प्रदेश के अन्नदाताओं का एक-एक दाना समर्थन मूल्य पर खरीदने का इतना दबाव रहा कि मार्कफेड और नागरिक आपूर्ति निगम की खरीदी एजेंसियों ने पिछले साल किसानों का सभी प्रकार का धान खरीद लिया। लेकिन जो धान खरीदा गया है उसमें अधिकांश उस गुणवत्ता का नहीं है जो केन्द्र सरकार के मापदंड के अनुसार एक क्विंटल में 67 किलो बेस्ट चावल तैयार कर मिलर्स दे सके। मुनाफा नहीं होने और धान की गुणवत्ता बेहतर नहीं होने तथा पिछले बार मिलिंग करने वाले मिलर्स पर हुई कार्रवाई से डरे मिलर्स अब राज्य सरकार का धान उठाने को तैयार नहंीं है। लगभग 8 लाख टन धान मध्यप्रदेश का सरकारी गोदामों में भरा पड़ा है। केन्द्र सरकार से इस धान खरीदी का भुगतान तब मिलेगा जब राज्य सरकार मिलर्स से इसकी मिलिंग कराकर तैयार चावल प्रति क्विंटल धान के हिसाब से 67 किलो तैयार चावल भारतीय खाद्य निगम के पास केन्द्र सरकार को भेजने के लिए जमा नहीं कराती। धान की मिलिंग लंबे समय तक नहीं हुई तो राज्य सरकार को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। राज्य सरकार ने प्रदेश के किसानों से 1850 रुपए प्रति क्विंटल के मान से खरीदी की है। यदि मिलिंग नहीं हुई तो लंबे समय बाद यह धान खराब हो सकती है और इसका खामियाजा राज्य सरकार को उठाना पड़ेगा।

प्रदेश में पैदा किया जाने वाला धान केन्द्र सरकार के गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरे और किसानों को फायदा हो, सारा धान खरीदा जा सके इसके लिए मैदानी अमला किसानों को बताएगा कि किस किस्म का धान बोए ताकि उपज ज्यादा और बेहतर हो। खराब धान को रिप्लेस करने का तरीका भी किसानों को बताया जाएगा।

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