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दक्षिणी चीन सागर में हमारे 2-2 विमानवाहक तैनात, अमेरिकी नौसेना का चीन पर तीखा हमला

 वाशिंगटन 
अमेरिकी नौसेना ने ग्लोबल टाइम्स की एक रिपोर्ट के आधार पर चीन पर पलटवार किया है। न्यूज रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन के पास एंटी एयरक्राफ्ट वाहक हथियारों का बड़ा जखीरा है और दक्षिण चीन सागर पूरी तरह से चीनी सेना के कब्जे में है। अमेरिकी नौसेना ने कहा कि इससे वे डरे नहीं हैं।

चीन के ग्लोबल टाइम्स ने एक ट्वीट में लिखा, "चीन के पास DF-21D और DF-26 जैसे हथियारों की लंबी शृखंला मौजूद है। दक्षिण चीन सागर पूरी तरह से एलपीए की मुट्ठी में है। इस इलाके में किसी भी अमेरिकी एयरक्राफ्ट वाहक की गतिविधि से PLA खुश हो जाएगी: विशलेषक"

ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिकी नौसेना के एक अधिकारी ने लिखा, 'दक्षिणी चीन सागर में अमेरिकी नौसेना का दो विमान वाहक मौजूद है। #USSNimitz और #USSRonaldReagan भयभीत नहीं हैं।' आपको बता दें कि जवाब के साथ हैशटैग #AtOurDiscretion का इस्तेमाल किया गया।

अमेरिका ने अपने दो विमान वाहक को दक्षिणी चीन सागर में यूएसएस रोनॉल्ड रीगन और यूएसएस निमित्ज को सैन्य अभ्यास के लिए भेजा है। यह अभ्यास लंबे समय से नियोजित है, लेकिन चीन ने भी पैरासेल द्वीप समूह के पास सैन्य अभ्यास आयोजित किया है, जिसकी अमेरिका और अन्य देशों द्वारा आलोचना की गई है। दक्षिण चीन सागर क्षेत्र में दो परमाणु ऊर्जा से चलने वाले विमान वाहकों के अमेरिकी नौसेना के संचालन ने इसे और बल दिया है।  हांगकांग सहित कई क्षेत्रों में वाशिंगटन और बीजिंग के बीच तनाव बढ़ गया। 

अमेरिका ने कोरोनो वायरस को लेकर भी लगातार चीन पर हमला बोला है। वॉशिंगटन ने बीजिंग पर दुनिया से जानकारी छिपाने का आरोप लगाया। चीन ने मई में ट्विटर पर एक संक्षिप्त वीडियो के साथ जवाब दिया, जिसमें कहा गया था कि वाशिंगटन कोरोनो वायरस प्रकोप पर बीजिंग से सावधानी के शब्दों को नहीं सुनता है।

एनिमेटेड वीडियो को गुरुवार को फ्रांस में चीनी दूतावास द्वारा ट्विटर पर पोस्ट किया गया और इसका शीर्षक था "वन्स अपॉन ए वायरस"। वीडियो में चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका कार्टून और आंकड़ों के साथ एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहा है। वीडियो में चीनी पक्ष का कहना है कि उसने जनवरी में एक नए वायरस की खोज के बारे में बताया, अमेरिका ने इसका कोई ध्यान नहीं रखा। एक मिनट 39 सेकंड के वीडियो में चीन को जनवरी में अपने लॉकडाउन की घोषणा करते हुए दिखाया गया है और अमेरिका इसे बर्बर करार दे रहा है।

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