विदेश

दक्षिण चीन सागर को लेकर अमेरिका और चीन अपने रुख पर अड़े

वॉशिंगटन
अमेरिका का चीन के साथ बढ़ते टकराव के बीच सैन्य तनाव पर रुख एकदम साफ है तो चीन भी नरम पड़ने के मूड में नहीं है। अमेरिका के डिफेंस विंग चीफ ने साफ-साफ कहा है कि प्रशांत महासागर में अमेरिका एक इंच भी पीछे नहीं हटेगा। वहीं, चीन भी चुप नहीं बैठा है और उसने कह दिया है कि अमेरिका सैनिकों की जान खतरे में डाल रहा है। दोनों देशों के बीच व्यापार से लेकर मानवाधिकार उल्लंघन और सबसे ज्यादा दक्षिण चीन सागर पर बने तनावपूर्ण हालात के बीच ऐसी बयानबाजी पर दोनों ही एक-दूसरे पर उकसाने का आरोप भी लगा रहे हैं।

'सैन्य कार्रवाई से ताकत बढ़ाने की कोशिश'
वॉशिंगटन ने बुधवार को दक्षिण चीन सागर में निर्माणकार्य और सैन्य कार्रवाई में लगीं चीन की 24 कंपनियों को ब्लैकलिस्ट कर दिया है। हवाई में अमेरिका के रक्षा सचिव मार्क एस्पर ने कहा है कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी आक्रामक सैन्य आधुनिकीकरण प्रोग्राम की मदद से दुनियाभर में ताकत स्थापित करना चाहती है। इसके तहत से PLA (पीपल्स लिबरेशन पार्टी) दक्षिण और पूर्व चीन सागर में और जहां ही सरकार को जरूरत लग रही है, वहां आक्रामक रवैया अपना रही है।

'एक इंच क्षेत्र नहीं छोड़ेंगे'
हालांकि, एस्पर ने यह भी कहा है कि अमेरिका चीन के साथ काम करके उन्हें 'ऐसे रास्ते पर लाएगा जो अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत आता हो।' एस्पर ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को चीन के साथ ताकत की लड़ाई का केंद्र बताया। उन्होंने कहा, 'हम इस क्षेत्र को छोड़ने वाले नहीं हैं, एक इंच को भी, किसी देश के लिए, किसी ऐसे देश के लिए जिसे लगता है कि उसकी सरकार, मानवाधिकार, संप्रभुता, प्रेस की फ्रीडम, धर्म की आजादी, असेंबली की आजादी पर उसके विचार दूसरों से बेहतर हैं।'

'अमेरिका के दबाव से डरता नहीं है चीन'
वहीं, चीन के रक्षा मंत्रालय ने आरोप लगाया है कि 'कुछ अमेरिकी नेता' चीन-अमेरिका के सैन्य संबंध नवंबर में होने वाले चुनावों से पहले अपने फायदे के लिए खराब करना चाहते हैं और सैन्य टकराव पैदा करना चाहते हैं। रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता वु सियान ने कहा है, 'इस तरह के व्यवहार से दोनों ओर के फ्रंटलाइन ऑफिसरों और सैनिकों की जान खतरे में पड़ती है।' उन्होंने कहा कि चीन अमेरिका के दबाव और उकसावे से डरता नहीं है। वह अपनी रक्षा करेगा और अमेरिका को कोई मुसीबत खड़ी नहीं करने देगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि अमेरिका रणनीतिक विजन अपनाएगा और चीन के विकास को खुले मन से देखेगा और किसी भी तरह की परेशानी को पीछे छोड़ देगा।

 

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