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दुनिया के 126 देशों में पेट्रोल से महंगा है डीजल

 नई दिल्ली 

भारत में भले ही डीजल की कीमत मंगलवार को पहली बार पेट्रोल से ज्यादा हुई हो, लेकिन दुनिया में 126 देश ऐसे हैं, जहां डीजल पेट्रोल से महंगा है। विश्व में 150 देशों में पेट्रोल-डीजल और गैस के दाम पर नजर रखने वाले ग्लोबल पेट्रोल प्राइसेस डॉट कॉम के मुताबिक, 84 फीसदी देशों में पेट्रोल लंबे समय से डीजल के मुकाबले सस्ता है।दुनिया के सभी देशों में डीजल की कीमतों का औसत 72.20 रुपये प्रति लीटर है। हालांकि भारत में इसकी कीमत 80 रुपये के करीब है। दुनिया में डीजल के औसत दाम 65.20 रुपये प्रति लीटर हैं, जबकि दिल्ली में यह 80 रुपये के ऊपर है। ऐसे में यह करीब पांच रुपये महंगा है।
 
सामान्यतया अमीर और विकसित देशों में पेट्रोल-डीजल के दाम गरीब और तेल निर्यातक देशों की तुलना में ज्यादा रहते हैं। हालांकि अमेरिका में पेट्रोल की कीमत कम रखी गई है। भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश समेत ज्यादातर दक्षिण एशियाई देशों में पेट्रोल-डीजल पर 45 से 60 फीसदी तक टैक्स है, इस कारण यहां कीमतें कुछ दिनों में लगातार बढ़ी हैं।

डीजल 80 रुपये प्रति लीटर के पार
लगातार 20वें दिन भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों के दाम बढ़े हैं। शुक्रवार 26 जून को राजधानी नई दिल्ली में पेट्रोल और डीजल दोनों अब 80 के पार हो गए हैं। अब भी यहां डीजल के मुकाबले पेट्रोल सस्ता है। शुक्रवार को ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने शुक्रवार को पेट्रोल की कीमत में 21 पैसे और डीजल की कीमत में 17 पैसे की बढ़ोतरी की है। अब दिल्ली में 1 लीटर पेट्रोल के दाम 80.13 रुपये और डीजल के दाम 80.19 रुपये है। 

एसयूवी खरीदारों को झटका
डीजल की कीमतें पेट्रोल से ज्यादा होने से ऑटो उद्योग को नुकसान उठाना होगा। इससे एसयूवी वाहनों की बिक्री प्रभावित होगी क्योंकि ज्यादातर एसयूवी में ईंधन के रूप में डीजल का इस्तेमाल होता है। ऑटो विशेषज्ञ टुटु धवन ने हिंदुस्तान को बताया है कि पेट्रोल की तुलना में डीजल की छोटी गाड़ियां करीब 90 हजार और बड़ी गाड़ियां 1.5 लाख महंगी हुआ करती थी। जिन ग्राहकों को महीने में करीब 4-5 हजार किलोमीटर गाड़ी चलानी होती थी उनके लिए सस्ते डीजल की वजह ये फायदे का सौदा होता था लेकिन अब दाम बराबर और बल्कि डीजल के पेट्रोल के मुकाबले महंगा होने के बाद ये फायदा नहीं रहेगा। डीजल गाड़ी उनके लिए महंगी साबित होने लगेगी और ग्राहक डीजल के बजाए पेट्रोल गाड़ी ही खरीदेंगे।

लोग स्वच्छ ईंधन अपनाएंगे
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि डीजल के दाम पेट्रोल से अधिक होने या बराबर हो जाने के दीर्घकालिक प्रभावों से प्रदूषण में कमी आएगी। ‘क्लाइमेट ट्रेंड’ की निदेशक आरती खोसला ने कहा कि हम लोग लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि डीजल कारों, एसयूवी को हतोत्साहित किया जाए। सरकार ने डीजल पर कर इसलिए कम रखे थे ताकि किसानों को खेती कार्य के लिए कम दाम पर डीजल मिले लेकिन इसका फायदा एसयूवी गाड़ियों वाले उठा रहे थे। इसलिए मौजूदा रुख कायम रखना चाहिए। किसानों को सरकार राहत देना चाहती है तो वह उन पर ही केंद्रित करके दी जाए। उन्होंने कहा कि लोग अब सीएनजी या इलेक्ट्रिक कारों को तरजीह देंगे। सरकार के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों को आगे बढ़ाने का भी यह अच्छा मौका है। 

मंहगे डीजल की मार सबसे अधिक किसान और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों पर पड़ने वाली है। किसानों के लिए खेतों की जुताई, बुआई, सिंचाई आदि की लागत 20 फीसदी से अधिक मंहगी हो जाएगी। किसान मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष और कृषि विशेषज्ञ वी.एम. सिंह ने कहा कि पेट्रोल-डीजल में उछाल से खेतों की जुताई, फसलों की सिंचाई, मंडी में अनाज भेजने आदि की लागत कम से कम 20 फीसदी बढ़ जाएगी। लिहाजा सरकार को खरीफ फसलों की एमएसपी बगैर देरी किए हुए बढ़ानी चाहिए, किसान तभी डीजल की मार से अपने को बचा सकेगा। 

आवश्यक वस्तुएं महंगी होंगी : ट्रांसपोर्टर यूनियन
ट्रांसपोर्टर क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि लॉकडाउन के बाद छोटे ट्रक ऑपरेटर परेशान हैं। देशभर में 90 लाख छोटे-बड़े ट्रक हैं, इसमें से 60 फीसदी बुकिंग नहीं मिलने के कारण खड़े हो गए हैं। ऑल इंडिया मोटर कांग्रेस के अध्यक्ष कुलतार अटवाल ने हिंदुस्तान को बताया कि पिछले 17 दिन में डीजल के दाम 10.25 पैसे बढ चुके हैं। इससे ट्रक ऑपरेशन की कीमत 20 फीसदी तक बढ़ी है। इससे माल भाड़े में वृद्धि होगी। भाड़े में बढ़ोतरी होने पर जनता को मंहगाई की मार सहने के लिए तैयार रहना होगा।

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