बिहारराज्य

दोनों देशों की सहमति , डैम की मरम्मत करने पहुंची भारतीय टीम

पश्चिम चंपारण
नेपाल से भारतीय सीमा में प्रवेश करने वाली नारायणी गंडक नदी पर बने बांध की मरम्मद के लिए दोनों देशों के बीच मंगलवार को सहमति बन गई। इसके बाद बिहार के जल संसाधन विभाग के मजदूर और उनकी टीम गंडक बांध की मरम्मत का काम करने के लिए नेपाल गई। बगहा के एसडीएम विशाल राज ने पुष्टि करते हुए बताया कि लगभग 50 मजदूरों को अनुमति दी गई है, अगर जरूरत होगी तो और भी मजदूर मरम्मत के लिए जाएंगे। हमने इसके बारे में बात की है।

बारिश की वजह से बढ़ गंडक नदी का जल स्तर
दरअसल बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले में पिछले दो दिन से लगातार रुक रुक कर बारिश हो रही थी। इससे नारायणी गंडक नदी का जलस्तर बढ़ गया है। महज़ दो दिनों में 1 लाख 19 हज़ार से बढ़कर 1.63 लाख क्यूसेक पानी गंडक बराज नियंत्रण कक्ष से छोड़ा गया है, जिससे नदी में उफान आ गया है। नदी में बढ़ते जल स्तर की वजह से बांध के नेपाल वाले हिस्से पर टूटने का खतरा मंडरा रहा था। नेपाल सीमा में पड़ने वाले बांध के हिस्से की मरम्मत नहीं हो पाई थी।

गंडक बराज के हैं कुल 36 फाटक
इंडो-नेपाल सीमा पर स्थित गंडक बराज के कुल 36 फाटक हैं। इसमें आधे यानी 18 फाटक नेपाल के हिस्से में पड़ते हैं और 18 भारत के हिस्से में। भारत के हिस्से में पड़ने वाले बांध के हिस्से की मरम्मत हो चुकी है, लेकिन नेपाल सीमा एरिया में पड़ने वाले बांध के हिस्से की मरम्मत का काम बाकी था।

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