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धान से बनने वाली खील स्वास्थ्य की दृष्टि से भी बहुत फायदेमंद

 

खील, ज‍िसे ज्यादातर लावा या लाई के नाम से भी जाना जाता है, हर घर की रसोई में आसानी से पाई जाती है। यह मुख्य रूप से धान से तैयार होती है। धार्मिक कार्यों (लोहड़ी, मकर संक्रांति, विवाह, लक्ष्मी पूजा, दीवाली) में इस्तेमाल किए जाने के साथ ही सेहत की दृष्टि से भी काफी फायदेमंद होती है।

खाने में सुपाच्य होने और इसमें पाए जाने वाले गुणों के कारण इसे हेल्दी ब्रेकफास्ट माना गया है। अपनी डाइट में इसे शाम‍िल करने पर यह आपको कई बीमारियों से बचा सकती है। आइए जानते हैं खील के हेल्थ बेनेफिट्स के बारे में-

खील में फाइबर की अधिकता होने की वजह से यह मोटापे को कम करने में आपकी मदद करता है। इसमें रेशे (फाइबर) काफी ज्यादा होते हैं, जो कब्ज की समस्या को दूर करने में मददगार होते हैं। इसके साथ ही इसमें फॉस्फोरस और क्षारीय पदार्थ की मात्रा भरपूर होती है।

खील में रेशे, फॉस्फोरस और क्षार (एल्कलाइंस) काफी मात्रा में पाए जाते हैं। अपने क्षारीय गुण के कारण यह किडनी में होने वाली परेशानियों से आपको बचाती है। इसके अलावा आप खील के पानी का भी सेवन कर सकते हैं। एसिडिटी से बचने के लिए खील के पानी में मिश्री डालकर पीना फायदेमंद होता है।

रक्तपित्त यानी खूनी पित्त (हैमेटाइसिस) में शरीर काफी गर्म हो जाता है, जिसके कारण नाक-कान, गुदा और मूत्रद्वार आदि स्थानों से खून बहने लगता है। लावा के चूर्ण (पाउडर) में गाय का घी और शहद मिलाकर खाने से हैमेटाइसिस में फायदा होता है।

खून युक्त दस्त और पेट की गरमी से होने वाली दस्त से परेशान हों तो शक्कर को घी में भूनकर पीस लें। इसमें खीलों का चूर्ण, मिश्री और शहद मिलाकर सेवन करें।

खील में भरपूर मात्रा में कार्बोहाइड्रेट होता है, जो आपको इंस्टेंट एनर्जी देता है। साथ ही यह बच्चों के ग्रोथ के लिए भी काफी फायदेमंद होता है। अगर आप फिजिकली कमजोर हैं तो अपनी डाइट में खील से बनी रेसिपी को जरूर शामिल करें।

धान से बना लावा पेट के लिए काफी फायदेमंद होता है। इसके सेवन से उल्टी में राहत मिलती है। जलन, उल्टी और बार-बार प्यास लगने पर इसके पाउडर में शक्कर और शहद मिलाकर सेवन करने से फायदा होता है। इसके अलावा लावा, कपित्थ, शहद और पिप्पली की जड़ को बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण में शहद मिलाकर सेवन करने से सभी प्रकार की उल्टी और भूख न लगने की समस्या दूर होती है। शाली धान से निर्मित लावे के दलिया में शहद मिलाकर सेवन करने से भी उल्टी आनी बंद हो जाती है। खील के पाउडर में शहद और घी मिलाकर खिलाने से भी उल्टी रुक जाती है।

खील का सेवन एक हेल्दी ब्रेकफास्ट के रूप में करना काफी फायदेमंद होता है। इसे खाने से भूख कम लगती है। सुपाच्य होने के कारण इससे कमजोर हाजमा भी ठीक होता है। इसे दूध में मिलाकर खाना एक उत्तम आहार माना जाता है। खील और दूध मिलकर कार्बोहाइ‍ड्रेट और विटामिन-डी का बढ़िया कॉम्‍बीनेशन तैयार करते हैं। इससे शरीर की हड्डियां मजबूत होती हैं।

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