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नर्सों की स्थिति पर दिल्ली हाई कोर्ट में पहुंचा केस

नई दिल्ली

दिल्ली में कोरोना संक्रमण के चलते नर्सों की मौत और इस्तेमाल की गई पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट्स किट्स से जुड़ी हुई एक याचिका हाई कोर्ट में दायर की गई है. इस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली सरकार और दिल्ली नर्सिंग काउंसिल को नोटिस भेजा है.

दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार को आदेश दिया है कि इस मामले में एक इंस्पेक्शन कमेटी बनाकर जांच की जाए और इसकी रिपोर्ट 1 हफ्ते के भीतर कोर्ट में दाखिल की जाए.

याचिकाकर्ता ने गुरुवार को कोर्ट को बताया कि पिछले 24 घंटे में ही कोरोना मरीजों के इलाज के दौरान खुद संक्रमित होकर एक नर्स की मौत हो चुकी है. ऐसे कई और मामले भी मार्च से अब तक सामने आ चुके हैं.

याचिकाकर्ता ने कहा कि दिल्ली के प्राइवेट नर्सिंग होम में खुद केंद्र सरकार द्वारा जारी की गई गाइडलाइंस का पालन नहीं किया जा रहा है. नर्सों को इस्तेमाल की गई पीपीई किट पहनने के लिए दी जा रही है.

'नर्सों को नहीं मिल रहे जरूरी उपकरण'

यचिका में कहा गया है कि कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज के दौरान स्वास्थ्य मंत्रालय की गाइडलाइन के मुताबिक मास्क, दस्ताने और अन्य जरूरी उपकरणों की सप्लाई भी नर्सों को नहीं मिल पा रही है.

जनहित याचिका में कहा गया है कि यह स्वास्थ्यकर्मियों के मानवाधिकारों का हनन है. कोविड-19 के मरीजों के इलाज में जुटे डॉक्टरों और हेल्थ वर्कर्स के बीच में भेदभाव नहीं किया जा सकता. सुरक्षा और इतिहास की जरूरत दोनों को है.

'प्राइवेट नर्सिंग होम्स में हालत खराब'

याचिका में कहा गया है कि नर्स भी फ्रंटलाइन हेल्थ वर्कर है, लिहाजा उन्हें भी प्रोटेक्शन दिए जाने की जरूरत है. ज्यादातर प्राइवेट नर्सिंग होम में इसका पालन नहीं हो रहा है. नर्सिंग होम रजिस्ट्रेशन एक्ट 1953 और रूल 2011 के तहत नर्सिंग स्टाफ को रजिस्टर किया गया है.

इस एक्ट के सेक्शन 9 के तहत सरकार के पास ही अधिकार होता है कि वह प्राइवेट नर्सिंग होम का इंस्पेक्शन कर सके और नर्सिंग स्टाफ को इंफेक्शन से बचाने के मद्देनजर प्राइवेट हॉस्पिटल को दिशानिर्देश जारी करे.

26 जून को दोबारा होगी सुनवाई

याचिका में मांग की गई है कि सभी प्राइवेट नर्सिंग होम और अस्पतालों से कोर्ट डाटा मंगाए कि कोविड 19 से उनके यहां कितने नर्सिंग स्टाफ संक्रमित हुए हैं, जिससे यह साफ हो सके कि उनके संक्रमित होने के पीछे अस्पतालों में उनकी सुरक्षा को लेकर की गई व्यवस्थाएं कितनी पुख्ता थीं.

इसके अलावा सभी प्राइवेट अस्पतालों को यह निर्देश दिए जाएं कि उनके यहां काम करने वाली नर्स प्रधानमंत्री गरीब कल्याण इंश्योरेंस के अंदर रखी जाएंगी. दिल्ली हाई कोर्ट इस मामले में 26 जून को दोबारा सुनवाई करेगा.

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