भोपालमध्यप्रदेश

निजी अस्पताल अब नहीं कर सकेंगे COVID-19 टेस्ट के नाम पर अवैध बसूली, अब कोरोना टेस्ट 1980/- निर्धारित

भोपाल
कोरोना संकटकाल में निजी अस्पतालों में भर्ती गर्भवती महिलाओं और दूसरी बीमारियों के मरीजों से कोरोना टेस्ट के नाम पर हो रही पांच से छ: हजार तक की वसूली पर स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव ने रोक लगाई है। निजी लैब में कोरोना टेस्ट कराने के लिए ढाई हजार रुपए निर्धारित होने के बावजूद शहर के अस्पतालों और नर्सिंग होम में भर्ती मरीजों से प्रायवेट लैब 5 से 6 हजार तक वसूल रहीं हैं। 30 जून के अंक में इस मामले को प्रदेश टुडे ने ‘कोरोना टेस्ट: सरकारी रेट 2500, निजी अस्पताल वसूल रहे 6 हजार’ के नाम से प्रकाशित किया था। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव ने इस मामले में आदेश जारी करते हुए कोरोना टेस्ट का शुल्क और कम करते हुए ढाई हजार से 1980 निर्धारित की है।

जानकारी के अनुसार देश में जब कोरोना का संकट आया तब आरटी-पीसीआर टेस्टिंग किट उपलब्ध नहीं थीं। 17 मार्च को आईसीएमआर द्वारा निजी लैब में जांच की फीस 4500 तय की थी। 24 अप्रैल को मप्र में इसे घटाकर 2500 रूपए किया गया था। लेकिन इसके बावजूद निजी अस्पताल और लैब मरीजों से कोरोना टेस्ट के नाम पर 5 से 6 हजार रूपए तक वसूल रहे हैं। अब स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव ने इसे घटाकर 1980 रूपए कर दिया है। अब इससे ज्यादा फीस निजी अस्पताल और लैब नहीं ले सकेंगे।

स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त प्रायवेट लैब रीजनल कलेक्शन सेंटर बनाकर जिलों से लिए गए उन सेंपल को कलेक्ट करेंगे। जिनकी जांच सरकारी लैब में लोड के कारण संभव नहीं हैं। साथ ही सरकार द्वारा प्रायवेट लैब को तभी सेंपल भेजे जाएंगे जब सरकारी लैब में सेंपल फुल हों। इन सेंपल की जांच के एवज में 1980 रूपए प्रति सेंपल टेस्ट भुगतान किया जाएगा।

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