उत्तर प्रदेशराज्य

निजी क्षेत्र को दिया जाएगा 200 बेड का सरकारी अस्पताल

लखनऊ
उत्तर प्रदेश के 16 जिलों में पीपीपी मॉडल पर खोले जाने वाले मेडिकल कालेजों में 50-50 सीटें मैनेजमेंट कोटे के लिए निर्धारित की जाएंगी। ऐसा निवेशकों को प्रोत्साहित करने के मकसद से किया गया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर चिकित्सा शिक्षा विभाग ने कार्ययोजना तैयार कर ली है।

जल्द ही मुख्यमंत्री इसकी समीक्षा करेंगे। मुख्यमंत्री ने कार्ययोजना में विलम्ब होने पर नाराजगी जाहिर की थी। कार्ययोजना के तहत 20 एकड़ जमीन संबधित जिले का जिला प्रशासन देगा और वहां मेडिकल कालेज खोलने और संचालन का जिम्मा निजी क्षेत्र का होगा। निजी क्षेत्र मेडिकल कालेजों की एमबीबीएस कोर्स की 50 फीसदी सीटें मैनेजमेंट कोटे के तहत भरने की छूट होगी। ये मेडिकल कालेज 100 सीटों से एमबीबीएस कोर्स की पढ़ाई शुरू करेंगे। पांच साल बाद ही ये 50 सीटें और बढ़ा सकते हैं।  

इन जिलों में खुलेंगे मेडिकल कालेज
प्रदेश में बागपत, बलिया, भदोही, चित्रकूट, हमीरपुर, हाथरस, कासगंज, महाराजगंज, महोबा, मैनपुरी, मऊ, रामपुर, संभल, संतकबीरनगर, श्रावस्ती व शामली जिलों में न तो कोई सरकारी और न ही कोई निजी मेडिकल कालेज है।

केन्द्र से मांगे 1600 करोड़
प्रदेश सरकार ने  केंद्र सरकार को 1600 करोड़ रुपये देने का मांग पत्र भी भेज दिया है। इस रकम से सरकार जमीन खरीदकर निजी क्षेत्र को मेडिकल कालेज बनाने के लिए उपलब्ध कराएगी। इसके अलावा निजी क्षेत्र को प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी।
तय किया गया है कि जिन मेडिकल कालेज विहीन जिलों में 200 से ज्यादा बेड का जिला अस्पताल होगा, उन्हें पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कालेज बनाने के लिए सामने आए निजी क्षेत्र को 10 साल के लिए लीज पर सौंप दिया जाएगा। जहां 200 से कम बेड का अस्पताल का होगा, वह निजी क्षेत्र को नहीं दिया जाएगा। एमसीआई की तय गाइडलाइन के अनुसार 300 बेड के अस्पताल वाले को ही मेडिकल कालेज बनाने की मान्यता दी जाएगी। इसलिए बाकी 200 बेड के अस्पताल देने के बाद बाकी 100 बेडों का इंतजाम निजी क्षेत्र को करना होगा। इन बेडों पर भर्ती मरीजों का इलाज केन्द्र सरकार या राज्य सरकार की योजनाओं के तहत होगा। जिला प्रशासन निजी क्षेत्र को मेडिकल कालेज बनाने के लिए  20 एकड़ जमीन 33 साल की लीज पर देगा।

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