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पतंजलि के कोरोना इलाज के शत प्रतिशत दावे पर क्या कहता है हमारा कानून?

 
नई दिल्ली 

 पतंजलि ने दावा किया है कि 'कोरोनिल' से कोरोना का शत प्रतिशत इलाज किया जा सकता है. योग गुरु रामदेव ने इस दवाई को कोरोना के खिलाफ कारगर बताते हुए कहा कि उनकी दवाई 'कोरोनिल' से सात दिन के अंदर 100 फीसदी रोगी रिकवर हो गए हैं. 'कोरोनिल दवा' का सौ फीसदी रिकवरी रेट है और शून्य फीसदी डेथ रेट है. हालांकि भारत सरकार के अंतर्गत आने वाला आयुष मंत्रालय योग गुरु के दावे से इत्तेफाक नहीं रखता.

डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी एक्ट 2005 के तहत अगर कोई व्यक्ति गलत दावा करता है तो इसे दंडनीय अपराध माना जाता है. जहां तक कोरोनिल दवाई को लेकर दावे की बात है तो वो संबंधित कानूनी प्रावधान का उल्लंघन है. ऐसे में सवाल उठता है कि कोरोनिल के दावे पर कानून क्या कहता है?
क्रिमिनल लॉयर और इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट में ड्यूटी काउंसिल दीपक आंनद मसीह के मुताबिक कानून दवा बनाने के लिए लाइसेंस देता है, दावा करने के लिए नहीं. 100% क्योर के दावे के बाद DMA कानून (डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी एक्ट 2005) को आपत्ति इसी दावे पर है. जिसमें एक साल से सात साल तक की सजा हो सकती है. ये वैश्विक महामारी है लिहाजा विदेशों में भी मुकदमे दर्ज हो सकते हैं. वैसे ही जैसे अमेरिका में चीन के खिलाफ हुए हैं.

बता दें, आयुष मंत्रालय ने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की खबर के आधार पर इस मामले को पहले ही संज्ञान में ले लिया है. मंत्रालय का कहना है कि कंपनी की तरफ से जो दावा किया है उसके फैक्ट और साइंटिफिक स्टडी को लेकर मंत्रालय के पास कोई जानकारी नहीं पहुंची है. मंत्रालय ने कंपनी को इस संबंध में सूचना देते हुए कहा है कि इस तरह का प्रचार करना कि इस दवाई से कोरोना का 100 प्रतिशत इलाज होता है, ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज (आपत्तिजनक विज्ञापन) कानून 1954 का उल्लंघन है.
  

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