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पाकिस्तान अब भी लगा है परमाणु प्रसार में, हथियारों का टारगेट भारत, जर्मन सरकारी रिपोर्ट ने चेताया

 
नई दिल्ली 

ग्लोबल वॉचडॉग ‘फाइनेंशियल एक्शन टास्कफोर्स’ (FATF) की ओर से पाकिस्तान को ‘ग्रे लिस्ट’ में जारी रखने के फैसले के बाद अब जर्मनी की एक सरकारी रिपोर्ट ने इस्लामाबाद को कठघरे में खड़ा किया है. रिपोर्ट ने परमाणु प्रसार को लेकर पाकिस्तान के खराब रिकॉर्ड का हवाला दिया है.

इससे पहले अमेरिकी विदेश विभाग भी आतंकवाद पर अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कह चुका है कि पाकिस्तान अब भी आतंकी नेटवर्क्स के लिए सुरक्षित पनाहगाह बना हुआ है. जर्मनी के राज्य बैडेन-वुर्टेमबर्ग के संविधान रक्षा दफ्तर की वर्ष 2019 के लिए सालाना रिपोर्ट16 जून, 2020 को जारी की गई.

रिपोर्ट में भारी तबाही वाले परमाणु, जैविक और रासायनिक हथियारों के प्रसार को विस्तार से बताया गया है. साथ ही ऐसी चीजों के उत्पादन और डिलिवरी सिस्टम के बारे में भी बताया गया है. रिपोर्ट में कहा गया है, "ईरान, पाकिस्तान, उत्तर कोरिया और सीरिया अभी भी ऐसी कोशिशों को बढ़ा रहे हैं. वे अपने मौजूदा हथियारों के भंडार को पूरा करने का लक्ष्य रखते हैं. वो हथियारों की मारक रेंज बढ़ाने, तैनाती और नए हथियार सिस्टम को सटीक बनाने का इरादा रखते हैं. वो जर्मनी से अवैध खरीद प्रयासों के जरिए आवश्यक उत्पाद और संबंधित जानकारी प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं.’’

रिपोर्ट में कहा गया है कि इस तरह के हथियारों का उत्पादन और प्रसार शांति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा है. जर्मनी की रिपोर्ट में उन बातों पर बल दिया गया है जो भारत हमेशा कहता आया है. रिपोर्ट कहती है कि पाकिस्तान का "व्यापक" "सैन्य" परमाणु कार्यक्रम भारत के खिलाफ निर्देशित है जिसे वो “कट्टर दुश्मन’’ मानता है.

रिपोर्ट के मुताबिक, “एक असैनिक परमाणु कार्यक्रम के अलावा पाकिस्तान कई वर्षों से एक व्यापक सैन्य परमाणु हथियार और कैरियर प्रोग्राम का संचालन कर रहा है. यह मुख्य रूप से "कट्टर दुश्मन" भारत के खिलाफ निर्देशित है, जिसमें परमाणु हथियार भी हैं.'' रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि पाकिस्तान जैसे देश जर्मनी में अहम संस्थानों और हाई टेक कंपनियों का इस्तेमाल कर के संबंधित सामग्री की अवैध खरीदारी की कोशिश कर सकते हैं. रिपोर्ट में कहा गया है, “जोखिमों को कम करने के लिए, यह दफ्तर जानकारी के अवैध ट्रांसफर के संभावित परिणामों और खतरों को लेकर जिम्मेदार लोगों को जागरूक करना चाहता है.”

रिपोर्ट में कहा गया है, “मौजूदा निर्यात प्रतिबंधों और बंदिशों से पार पाने के लिए ये जोखिम वाले देश अपनी खरीद प्रक्रिया को लगातार विकसित और अनुकूलित करते रहते हैं. आखिर में ये सामग्री या जानकारी किस तक पहुंचेगी, इसे छुपाने के लिए वे विशेषरूप से बनाई गई कवर कंपनियों की सहायता से जर्मनी और यूरोप में सामान खरीद सकते हैं. बाइपास देशों में संयुक्त अरब अमीरात, तुर्की और चीन शामिल है.''
 
यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब अमेरिकी विदेश विभाग ने आतंकवाद पर अपनी वार्षिक रिपोर्ट हाल में जारी की है. उस रिपोर्ट में कहा गया कि पाकिस्तान “अन्य क्षेत्रों पर फोकस रखने वाले आतंकवादी समूहों के लिए एक सुरक्षित पनाहगाह बना हुआ है. इसने अफगानिस्तान को टारगेट करने वाले समूहों जैसे कि अफगान तालिबान और संबंधित HQN को अपनी जमीन से इजाजत दे रखी है. इसके अलावा भारत को टारगेट करने वाले लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) भी पाकिस्तानी जमीन से ऑपरेट कर रहे हैं." अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता हमेशा ऐसे देश को लेकर रही है जो परमाणु हथियार रखता है और साथ ही आतंकी नेटवर्क्स के साथ उसका नाता है. सबसे बड़ी फिक्र इसी बात की है कि परमाणु हथियार गलत हाथों में न पड़ जाएं.

 

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