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पाकिस्तान में 5 नौजवानों की होनी थी आतंकी ट्रेनिंग, खालिस्तान के तीन संदिग्धों ने किए कई सनसनी खेज खुलासे

 नई दिल्ली  
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पाकिस्तानी खुफिया इकाई आईएसआई के इशारे पर काम करने वाली खालिस्तान लिबरेशन फ्रंट (केएलएफ) के तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों के निशाने पर दिल्ली सहित उत्तर भारत के नेता समेत कई बड़ी हस्तियां थीं। ये खासतौर पर उत्तर भारत में बड़ी आतंकी वारदात को अंजाम देने की फिराक में जुटे थे। पुलिस के हत्थे चढ़े इन तीनों आरोपियों पर नेताओं व वीआईपी हस्तियों की हत्या करने और कई से जबरन वसूली करने के अलावा खालिस्तान आंदोलन से नौजवानों को जोड़कर उन्हें सीमा पार में आतंकी ट्रेनिंग दिलाने का आरोप है। 

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के हत्थे चढ़े तीनों आरोपियों ने पूछताछ में सनसनीखेज खुलासे किए हैं। पता चला है कि दबोचे गए आरोपियों में से एक लवप्रीत उर्फ लवली समेत पांच नौजवानों को सीमापार में आतंकी ट्रेनिंग के लिए भेजा जाने वाला था। आईएसआई के अब्दुल्ला नाम का एक शख्स हथियार और रकम मुहैया कराने के लिए गिरफ्तार आरोपियों में से ही एक गुरतेज के संपर्क में था। आरोपी गुरतेज ने तो आतंकी ट्रेनिंग के लिए सीमापार जाने वाले नौजवानों को एके-47 मुहैया कराने का भी वादा किया था।   

पाकिस्तान में आईएसआई ने नौजवानों को 15 दिनों की ट्रेनिंग देने की व्यवस्था की थी। स्पेशल सेल की मानें तो गुरतेज सिंह लॉकडाउन के कारण ट्रेनिंग में देरी होने पर नौजवानों को तब तक यहीं उम्दा क्वालिटी के हथियार मुहैया कराने में जुटा था और इसके लिए उसने अपने नेटवर्क के लोगों से बात भी कर ली थी। लेकिन इसके पहले ही उसे स्पेशल सेल ने धर दबोचा। 

गिरफ्तार आरोपियों में दूसरा- मोहिंदर पाल केएलएफ के पूर्व भारतीय प्रमुख हरमीत सिंह उर्फ पीएचडी की मृत्यु के बाद संगठन के गुरशरणवीर सिंह के संपर्क में आया था। दोनों ने यू.के. और अन्य देशों में स्थित खालिस्तानी नेताओं के इशारे पर टारगेट किलिंग को अंजाम देने की योजना भी बनाई थी, जिन्हें आईएसआई से समर्थन मिल रहा है। इसके लिए, इन्होंने लगभग छह महीने पहले एक नया सिम कार्ड और एक नया मोबाइल फोन लिया और ये अपने टारगेट की पहचान करने और खालिस्तान आंदोलन में नए युवाओं को शामिल करने की योजना में जुटे रहे। लेकिन देशव्यापी लॉकडाउन के कारण ये अपनी साजिश को अमली जामा नहीं पहना पाए और स्पेशल सेल ने इन्हें गिरफ्तार कर लिया।

सोशल मीडिया पेज पर भड़काऊ पोस्ट डालते थे
गिरफ्तार आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर बहुत सक्रिय हैं और फेसबुक व व्हाट्सएप के माध्यम से भारत और विदेशों में खालिस्तान आंदोलन के अन्य सदस्यों और 21 हवारा समिति के सदस्यों के संपर्क में हैं। इसके लिए इन्होंने 'खालसा भिंडरेवालाजी' नाम से एक फेसबुक पेज बनाया है। इस पेज पर आरोपी लवप्रीत ने अपना नाम- 'लवप्रीत सिंह 1984' और 'लवप्रीत सिंह खालिस्तानी' लिखा है। उसने खालिस्तान नेताओं और खालिस्तान आंदोलन के समर्थन में पोस्टर, फोटो और गाने के साथ कई भड़काऊ वीडियो भी इस पेज पर साझा किए हैं। 

केएलएफ के विदेशी आतंकियों के संपर्क में थे
आरोपी लवप्रीत के बारे में तो स्पेशल सेल का कहना है कि वह केएलएफ के कुख्यात आतंकवादी धन्ना सिंह के संपर्क में भी है, जिसकी वर्तमान में लोकेशन यूके बताई जाती है। दोनों फेसबुक पेज के साथ-साथ व्हाट्सएप के जरिए भी जुड़े थे। धन्ना सिंह ने उसे पाकिस्तान में अपने प्रशिक्षण के दौरान के कई फोटो और वीडियो भेजे हैं। इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान करने के लिए और प्रयास किए जा रहे हैं, जिनमें सीमा पार और विदेशों में भी शामिल हैं। पुलिस अब इनसे पूछताछ कर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आखिरकार केएलएफ के इस मॉड्यूल में कौन-कौन से लोग शामिल हैं और इनलोगों ने किन-किन वीआईपी हस्तियों को निशाने पर रखा था। 

आरोपियो के प्रोफाइल
1- गुरतेज सिंह 
गुरतेज का जन्म वर्ष 1979 में असम में हुआ था। उसके पिता सेना में सूबेदार थे। वह पाक आईएस के हैंडलर यानि अब्दुल्ला और अवतार सिंह पन्नू, सिख फॉर जस्टिस (भारत में प्रतिबंधित) और गोपाल सिंह चावला के संपर्क में था, जो पाकिस्तान में स्थित है और हाफिज सईद का करीबी सहयोगी है। चूंकि उसका लंबे समय से खालिस्तान आंदोलन के प्रति झुकाव था, लिहाजा उसने जनवरी 2019 में चंडीगढ़ में नारायण सिंह चौरा से मुलाकात की और खालिस्तान आंदोलन में सक्रिय रूप से योगदान करने की इच्छा जताई। इसके बाद गुरतेज सिंह को 21 सदस्यीय हवारा समिति में शामिल किया गया था। वह लवप्रीत समेत 5 से अधिक युवाओं को खालिस्तान आंदोलन में शामिल कर उन्हें पाकिस्तान में प्रशिक्षण दिलाने की तैयारी में था। 

2- मोहिंदर पाल सिंह 
मोहिंदर पाल सिंह का जन्म 1991 में जम्मू-कश्मीर के बारामुला के दीवान बाग में हुआ था। 2007 में, वह पढ़ाई करने के लिए दिल्ली आया था, लेकिन उसने पढ़ाई पूरी नहीं की। 2013 में गुरबख्श सिंह खालसा गुरुद्वारा अम्ब साहिब में 44 दिनों की भूख हड़ताल पर चले गए थे, उसमें मोहिंदर पाल सिंह भी शामिल हुआ था। इसके बाद वह खलिस्तान आंदोलन से जुड़े संगठनों और उनके आकाओं से जुड़ गया था। 

3- लवप्रीत सिंह उर्फ लवली 
लवप्रीत सिंह उर्फ लवली ने शुरू में एक कंप्यूटर की मरम्मत की दुकान पर काम किया और वर्तमान में वह घरों में सीसीटीवी कैमरे लगाने का काम करता है। वह करीब तीन साल पहले खालिस्तान आंदोलन में शामिल लोगों से जुड़ गया था।  2017 में वह अमृतसर में बलजीत सिंह और बागीचा सिंह के संपर्क में आया। ये दोनों 21 सदस्य हवारा समिति का हिस्सा हैं। उन्होंने इसे खालिस्तान समर्थक रैलियों में बुलाया, जहां पंजाब के मनसा में उसकी मुलाकात गुरतेज सिंह से हुई।  

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