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पेंशनधारी सैनिकों के लिए खुला नेपाल बॉर्डर, 3 दिनों की अनुमति दी

पिथौरागढ़
उत्तराखंड में भारत और नेपाल की सीमा पर तीन जगहों पर पुलों को खोल दिया गया है। सीमा विवाद को लेकर चल रही तनातनी के बीच करीब 4 महीनों के बाद भूतपूर्व सैनिकों के लिए धारचुला, जौलजिबी, जूलाघाट पर पुलों को खोल दिया गया है। भारतीय सेना के पूर्व सैनिक नेपाल से भारत में आकर अपनी पेंशन ले सकें।

 अनुसार भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दे चुके 1600 से अधिक नेपाली नागरिक पिछले 4 महीनों से पेंशन नहीं निकाल पा रहे थे। कोरोना वायरस की वजह से दोनों देशों में मार्च से ही हुए लॉकडाउन और फिर सीमा विवाद की वजह से सीमाएं बंद थीं। पूर्व सैनिकों की अपील पर गृह मंत्रालय ने गाइडलाइंस जारी करते हुए तीन दिनों (बुधवार से शुक्रवार) तक बॉर्डर को खोले जाने का आदेश जारी किया।

नेपाल के बैताड़ी इलाके के 78 वर्षीय पेंशनर धन सिंह रावल की पेंशन निकालने के बाद ही मौत हो गई। वह अपने बेटे राम सिंह के साथ झूलाघाट की एसबीआई ब्रांच में आए थे। झूलाघाट के एसएचओ टी एस राणा ने बताया, 'धन सिंह ने बैंक अधिकारियों को बताया कि वह स्वस्थ महसूस नहीं कर रहे हैं। स्टाफ ने प्राथमिकता से 80 हजार रुपये निकालने में उनकी मदद की। उनके बेटे ने बताया कि पिता अस्थमा के मरीज थे और बैंक से निकलते ही उन्हें अटैक आया था।'

बैंक अधिकारियों के अनुसार बुधवार को पेंशनर्स ने तकरीबन 70 लाख रुपये की निकासी की। पिथौरागढ़ के डीएम विजय कुमार जोगदांडे ने बताया कि बुधवार को नेपाल से करीब 110 पेंशनर्स ने परिवार के साथ सीमा को पार किया।

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