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प्रदेश के चार जिलों में लापरवाही से कोरोना मरीजों के मौत, CM शिवराज ने जताई नाराजगी

भोपाल
प्रदेश के चार जिलों में चिकित्सकों की लापरवाही से कोरोना मरीजों के मौत हो गई है। राज्य सरकार ने इसकी जानकारी सामने आने के बाद सख्ती देते हुए कहा है कि किसी भी स्थिति में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी इस तरह के हालातों पर नाराजगी जताई है जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव ने सभी कलेक्टरों को चिकित्सा सुविधा मजूबत रखने और बगैर इलाज की स्थिति में लापरवाही नहीं करने के निर्देश दिए हैं। कोरोना संकटकाल में संदिग्ध मरीजों को समय पर सही इलाज नहीं मिल पा रहा है।

सरकार मरीजों की समय से पहचान (अर्ली डिटेक्शन) और उपचार के कई बार आदेश दे चुकी है। इसके बावजूद मरीजों को शुरुआती दौर में ही डॉक्टर्स द्वारा स्क्रीनिंग, सैंपलिंग और लक्षणों के आधार पर इलाज की व्यवस्था न करने से मरीज की हालत बिगड़ रही है। पीएस फैज अहमद किदवई ने सभी कलेक्टर्स और सीएमएचओ को भेजे पत्र में कहा है कि कोरोना के मरीजों की पहचान, इलाज में और रेफरल में हुई देरी के कारण स्थिति बिगड़ने की जानकारी सामने आई है। उन्होंने बिगड़ी स्थिति में हुई मौतों के उदाहरण देकर व्यवस्था सुधारने को कहा है। जिन जिलों में ज्यादा मौतें हो रहीं हैं उन जिलों को पीएस के पत्र में कोड किए जाने के कारण वहां के स्वास्थ्य महकमें में हड़कंप मचा हुआ है।

पीएस हेल्थ द्वारा लिखे गए पत्र में कहा गया है कि  भोपाल के जेपी अस्पताल में एक 40 साल का मरीज बुखार की शिकायत के चलते पंहुचा था। यहां ट्राइजिंग की व्यवस्था न होने के कारण वह ओपीडी में चला गया जहां डॉक्टर ने उसका ब्लड प्रेशर और टेम्प्रेचर चेक किए बिना उसको सिम्टोमैटिक और सपोर्टिव ट्रीटमेंट देकर घर भेज दिया। 5 दिन बाद उसकी हालत बिगड़ी तो वह दोबारा गंभीर स्थिति में जेपी अस्पताल आया, यहां से उसे मेडिकल कॉलेज भेज दिया। मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर कोरोना जांच के लिए सैंपल लिए। रिपोर्ट में वह कोरोना पॉजिटिव पाया गया। यदि समय पर जेपी अस्पताल के डॉक्टर ने उसकी सही स्क्रीनिंग और जांच कराई होती तो शायद उसकी मौत न होती।

शाजापुर में 40 वर्षीय मरीज को 2-3 दिन से बुखार और सांस लेने में तकलीफ थी। उसने नजदीकी एएनएम को दिखाया। कोरोना के लक्षण होने के बावजूद एएनएम ने उसे जिला अस्पताल के कोविड केयर सेंटर भेजने के बजाय दवाइयां देकर घर भेज दिया। हालत बिगड़ी तो परिजन जिला अस्पताल लेकर पंहुचे। यहां भी प्रोटोकॉल के अनुसार डॉक्टर इलाज की सही व्यवस्था नहीं कर पाए। दो दिन बाद उसे इंदौर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। यहां उसकी मौत हो गई।

विभागीय पत्र के अनुसार जब राज्य स्तर से डॉक्टर्स को प्रशिक्षण दिया जा रहा था, तब शाजापुर के डॉक्टर व्यस्त होने के कारण ट्रेनिंग भी नहीं ले पाए थे। ऐसी लापरवाही के मामले इंदौर जिले में भी हुए। क्वारेंटाइन सेंटर में रखी गई एक 50 वर्षीय महिला का हाईरिस्क कॉन्टेक्ट होने और सर्दी-जुकाम बुखार के बावजूद समय पर सेंपलिंग नहीं कराई गई। नतीजतन महिला की मौत हो गई।

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