राजनीतिक

प्रियंका गांधी वाड्रा को  23 साल पहले अलॉट हुआ था लोधी एस्टेट में बंगला

नई दिल्ली 
कोरोना वायरस के संकट काल और बॉर्डर पर चीन से जारी तनातनी के बीच भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच में चल रही राजनीतिक लड़ाई और भी तेज़ हो गई है. केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय की ओर से कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा को दिल्ली के लोधी एस्टेट स्थित सरकारी बंगले को छोड़ने का नोटिस मिला है. प्रियंका को एक अगस्त तक इसे खाली करना होगा. कांग्रेस ने इसे खुद पर हमला बताया है.

क्यों भेजा गया है नोटिस?

दरअसल, पिछले साल नवंबर महीने में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने देश में SPG सुरक्षा को लेकर रिव्यू किया था. इसके बाद गांधी परिवार यानी सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से SPG कवर वापस ले लिया गया था. अब इन तीनों के पास Z प्लस सुरक्षा है, वो भी CRPF के साथ. प्रियंका गांधी को इसी प्रोटेक्शन के तहत लोधी एस्टेट में एक सरकारी बंगला अलॉट था, अब केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय का कहना है कि क्योंकि ये प्रोटेक्शन नहीं है, इसलिए आपको एक अगस्त तक बंगला खाली करना होगा. ऐसा ना करने पर अतिरिक्त किराया देना होगा.
 
कब मिला था प्रियंका को बंगला?
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, प्रियंका गांधी वाड्रा को 21 फरवरी, 1997 में लोधी रोड स्थित बंगला अलॉट किया गया था. तब उनके पास SPG सुरक्षा थी, लेकिन Z प्लस सुरक्षा में बंगला नहीं मिलता है. एजेंसी के अनुसार, प्रियंका गांधी इस बंगले के लिए 37 हजार रुपये प्रति महीने का किराया दे रही थीं.

एजेंसी को एक अधिकारी ने बताया कि साल 2000 में ही ये नियम बना दिया गया था कि जिस व्यक्ति के पास SPG सुरक्षा नहीं है, उसे किसी तरह का सरकारी बंगला नहीं दिया जाएगा. पहले तय हुआ था कि इस श्रेणी में बंगले को मार्केट रेट से 50 फीसदी अधिक के किराये के रुप में दिया जाएगा, लेकिन बाद में इसे 30 फीसदी तक कर दिया गया.

क्या कहती है कांग्रेस पार्टी?
कांग्रेस पार्टी की ओर से इस फैसले को बदले की कार्रवाई बताया गया है. रणदीप सुरजेवाला का कहना है कि प्रियंका गांधी वाड्रा लगातार केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार पर निशाना साध रही हैं, इसी वजह से मोदी सरकार ने बदले में ये फैसला लिया है. पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी इस फैसले को वापस लेने को कहा है. दूसरी ओर खबर है कि अब प्रियंका गांधी वाड्रा लखनऊ में शिफ्ट हो सकती हैं, क्योंकि आगे 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव हैं. ऐसे में कांग्रेस अभी से तैयारी में जुट रही है.

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