जबलपुर

फर्जी अंकसूची से नौकरी पाने वाले चार आरोपितों की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने फर्जी अंकसूची से प्रयोगशाला तकनीशियन पद पर नियुक्ति पाने वाले चार आरोपितों की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति राजीव कुमार दुबे की एकल पीठ ने कहा कि मामला गंभीर होने के कारण आरोपितों को अग्रिम जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता है।

अभियोजन के अनुसार मुख्य चिकित्सा व स्वास्थ्य अधिकारी, जबलपुर ने आठ मार्च, 2019 को ओमती थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई कि अरविंद रजक, साधना मर्सकोले, संदीप बर्मन और कढ़ोरी लाल प्रजापति को प्रयोगशाला तकनीशियन के पद पर नियुक्ति दी गई थी। नियुक्ति के बाद जब उनकी हायर सेकेंडरी की अंक सूची का सत्यापन कराया गया तो पता चला कि उनकी अंकसूची फर्जी है।

इसके आधार पर ओमती पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ धारा 420, 467, 468, 471 और 120 बी का प्रकरण दर्ज किया गया। आरोपितों की ओर से अग्रिम जमानत का आवेदन पेश किया गया। शासन की ओर से शासकीय अधिवक्ता प्रदीप गुप्ता ने अग्रिम जमानत दिए जाने का विरोध किया। सुनवाई के बाद एकल पीठ ने चारों आरोपितों की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी।मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने सागर के जिलाधीश को निर्देश दिया है कि कटरा बाजार सागर से यातायात थाना दूसरी जगह ले जाने के अभ्यावेदन पर विचार कर निर्णय लिया जाए। मुख्य न्यायाधीश मोहम्मद रफीक व न्यायमूर्ति सत्येंद्र कुमार सिंह की युगलपीठ ने इस निर्दश के साथ याचिका का पटाक्षेप कर दिया है।

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