राजनीतिक

बंगाल चुनाव: BJP के आक्रमक रुख ने बढ़ाई TMC की परेशानी 

 नई दिल्ली 
जीएसटी और जेईई-नीट परीक्षा के मुद्दे ने विपक्ष को एकजुट होने का मौका दे दिया है। कांग्रेस की अगुआई में विपक्षी दलों की बैठक में दूरी बनाए रखने वाली तृणमूल कांग्रेस इस बार साथ खड़ी नजर आई। मानसून सत्र से ठीक पहले हुई इस बैठक से संसद के अंदर और बाहर विपक्षी एकता की उम्मीद बढ़ी है। केंद्र सरकार के खिलाफ कांग्रेस विपक्षी दलों को एकजुट करने की लगातार कोशिश करती रही है, पर पिछली कुछ बैठकों में तृणमूल कांग्रेस गैरहाजिर रही थी। ममता के रुख में आए इस बदलाव को कांग्रेस रणनीति पश्चिम बंगाल से जोड़कर देख रहे हैं। पश्चिम बंगाल में अगले साल विधानसभा चुनाव हैं।
 
पश्चिम बंगाल को लेकर भाजपा बेहद अक्रामक है। ऐसे में कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियां एकजुट होकर मोर्चा बना लेती हैं तो तृणमूल कांग्रेस के लिए भाजपा का मुकाबला करना मुश्किल होगा। पार्टी के एक नेता ने कहा कि ममता बनर्जी कांग्रेस के साथ गठबंधन न भी करे तो उनकी कोशिश होगी कि कांग्रेस अकेले चुनाव लड़े। कांग्रेस और लेफ्ट एकजुट होते हैं तो अल्पसंख्यक मतदाताओं का भरोसा जीत सकता है। इसका सीधा नुकसान तृणमूल कांग्रेस को होगा। यही वजह है कि ममता ने स्थिति को समझते हुए अपना रुख नरम किया है। वह कांग्रेस के साथ अपने रिश्तों को सुधारना चाहती है। ताकि भाजपा को रोकने में मदद मिल सके।
 
इस बैठक में तृणमूल कांग्रेस के साथ शिवसेना ने जिस तरह का रुख अपनाया है, उससे कांग्रेस उत्साहित है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि इससे विपक्षी एकजुटता को मजबूती मिलेगी। झारखंड के मुख्यमंत्री हमेंत सोरेन ने भी इस बात पर जोर दिया कि विपक्ष की आवाज कमजोर पड़ रही है। हम सबको मिलकर कार्यक्रम बनाना चाहिए।

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