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बच्‍चों को घर पर बनाकर खिलाएं बादाम का पाउडर, सेहत होगी दुरुस्‍त

बादाम में कई पोषक तत्‍व होते हैं इसलिए बच्‍चों की डायट में बादाम को शा‍मिल करना बहुत जरूरी होता है। शिशु के ठोस आहार खाना शुरू करने पर बादाम को आहार में जरूर शामिल करना चाहिए। आप बादाम का पाउडर बनाकर बच्‍चों को खिला सकते हैं। आप घर पर ही बादाम का पाउडर बनाकर बच्‍चों को खिला सकते हैं। यहां हम आपको बादाम का पाउडर बनाने और शिशु के लिए इसके फायदों के बारे में बता रहे हैं।

शिशु के लिए बादाम पाउडर के फायदे
बादाम में अनेक पोषक तत्‍व होते हैं जैसे कि विटामिन ई। यह पोषक तत्‍व शिशु की त्‍वचा को नरम और मुलायम बनाता है। इसके अलावा बादाम खाने से शिशु का इम्‍यून सिस्‍टम भी मजबूत होता है। यह शिशु और बच्‍चों के मस्तिष्‍क के विकास में भी मदद करता है। बादाम के पाउडर से बच्‍चों की हड्डियों को भी मजबूती मिलती है।
 
दिमाग के लिए ब्रोकली सुपरफूड का काम करती है। इसमें डीएचए होता है जो न्‍यूरॉन्‍स के बीच संबंध में मदद करते हैं। ब्रोकली में कैंसर-रोधी गुण भी पाए जाते हैं। आप अपने बच्‍चे के आहार में ब्रोकली को शामिल जरूर करें।यह भी पढ़ें : इस उम्र में शिशु को केला जरूर खिलाएं, मिलेगा दोगुना फायदा
​एवोकैडो
मस्तिष्‍क को स्‍वस्‍थ रखने के लिए एवोकैडो लाभकारी होता है। एवोकैडो में अनसैचुरेटेड फैट होता है जिससे मस्तिष्‍क में रक्‍त प्रवाह तेज होता है। इसमें मौजूद ओलिक एसिड भी होता है जो माइलिन को सुरक्षा प्रदान करता है। माइलिन की मदद से दिमाग में सूचना 200 मील प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रैवल करती है। इस फल में विटामिन बी कॉम्‍प्‍लैक्‍स भी होता है जो बच्‍चों में हाई बीपी के खतरे को कम करता है।
​मछली
फैटी फिश जैसे कि सैल्‍मन, ट्यूना और मैकरेल में ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है जो मस्तिष्‍क के ऊतकों के ब्‍लॉक बनाने में मदद करता है। ओमेगा-3 फैटी एसिड के और भी कई फायदे होते हैं। इससे शिशु के मस्तिष्‍क के कार्यों और विकास में मदद मिलती है। मछली के नियमित सेवन से बच्‍चों का मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य दुरुस्‍त रहता है।यह भी पढ़ें : बच्‍चों की नाजुक त्‍वचा की इन जड़ी बूटियों से करें देखभाल
​अंडा और साबुत अनाज
अंडे में ओमेगा-3 फैटी एसिड, ल्‍यूटिन, कोलिन और जिंक होता है। ये सभी पोषक तत्‍व शिशु की ध्‍यान लगाने की क्षमता को बढ़ाते हैं। कोलिक एसिटेकोलिन या मेमोरी स्‍टेम सेल्‍स बनाने में मदद करता है। इस तरह अंडा खाने से बच्‍चों की याददाश्‍त में सुधार आता है।साबुत अनाज से बच्‍चों के दिमाग को निरंतर एनर्जी मिलती है। ये रक्‍त वाहिकाओं में ग्‍लूकोज को धीरे से रिलीज करता है जिससे शिशु के शरीर में दिनभर एनर्जी बनी रहती है। इसमें मस्तिष्‍क के सही तरह से कार्य करने के लिए जरूरी फोलिक एसिड भी होता है।

​ओट्स और सूखे मेवे
बच्‍चों को नाश्‍ते में ओट्स खिलाने से मस्तिष्‍क के कार्यों में सुधार आने में मदद मिलती है। ओट्स विटामिन ई, जिंक और विटामिन बी कॉम्‍प्‍लेक्‍स प्रचुरता में पाया जाता है। ओटमील में फाइबर भी उच्‍च मात्रा में होता है जिससे शिशु के शरीर को एनर्जी मिलती है।अखरोट, बादाम और मूंगफली जैसे सूखे मेवे बच्‍चों के मस्तिष्‍क के विकास के लिए बहुत जरूरी होते हैं। इनमें विटामिन ई उच्‍च मात्रा में होता है जिससे दिमाग की बौद्धिक क्षमता को नुकसान पहुंचने से बचाव मिलता है। इनमें मौजूद जिंक की मात्रा दिमाग के विकास और याददाश्‍त को सुधारने का काम करती है।यह भी पढ़ें : शिशु की बादाम तेल से मालिश करने के फायदे

बादाम पाउडर के पोषक तत्‍व
100 ग्राम बादाम के पाउडर में 22 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 20 ग्राम प्रोटीन, 50 ग्राम फैट, 12 ग्राम डायट्री फाइबर, 25 मिलीग्राम विटामिन ई, 700 मिलीग्राम पोटैशियम, 250 मिलीग्राम कैल्शियम, 258 मिलीग्राम मैग्‍नीशियम और 480 मिलीग्राम फास्‍फोरस होता है।

शिशु को किस उम्र से खिलाएं बादाम पाउडर
शिशु के 6 महीने के होने के बाद कभी भी ठोस आहार शुरू कर सकते हैं। वैसे बेहतर होगा कि आप शिशु के नौ महीने के होने के बाद बादाम पाउडर खिलाएं। शुरुआत में कम मात्रा में ही खिलाएं और देखें कि शिशु को इससे एलर्जी तो नहीं हो सकती है। अगर एलर्जी नहीं है जो धीरे-धीरे इसकी मात्रा बढ़ा दें। शुरुआत में एक चम्‍मच बादाम पाउडर दें और फिर इसकी मात्रा बढ़ाकर तीन चम्‍मच प्रतिदिन कर दें।
 
नारियल तेल में सैचुरेटेड फैट होता है जो शिशु की त्‍वचा को मुलायम और मॉइस्‍चराइज रखता है। इसमें एंटीबैक्‍टीरियल, एंटीफंगल और एंटीवायरल गुण होते हैं जिससे रैशेज के इलाज में मदद मिलती है।आधा चम्‍मच शुद्ध नारियल तेल लें और उसे हथेलियों पर लगाकर प्रभावित हिस्‍से की मालिश करें। दिन में दो से तीन बार इस नुस्‍खे को अपनाएं।यह भी पढ़ें : शिशु की हड्डियां मजबूत करने के लिए इस उम्र में दें डेयरी प्रोडक्‍ट
​ओटमील
इसमें उच्‍च मात्रा में मौजूद प्रोटीन शिशु की त्‍वचा को मुलायम करता है। इसमें सैपोनिन नामक यौगिक भी होता है जो स्किन के रोमछिद्रों से धूल-मिट्टी और तेल को हटाता है। ओटमील के एंटी-इंफ्लामेट्री गुण डायपर रैशेज की वजह से होने वाली जलन और सूजन को भी दूर करता है।यह भी पढ़ें : शिशु को कब, कैसे और किस उम्र से खिलाना चाहिए खीराएक चम्‍मच सूखे ओटमील को शिशु के नहाने के पानी में मिला दें। इस पानी में शिशु को 15 से 20 मिनट के लिए बैठाएं। अब शिशु को पानी से बाहर निकाल कर अच्‍छी तरह से पोंछ लें। ऐसा आपको दिन में दो बार करना है।
 

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