ग्वालियरमध्यप्रदेश

बढ़ते यातायात से ट्रैफिक हो रहा बाधित, यातयात विभाग करेगा कार्यवाही

शिवपुरी
अपनी जेबें भरने के लिए नियम कायदों को ताक पर रखकर शहर के अधिकांश निजी अस्पताल संचालित हो रहे है इसका खुला प्रमाण शहर के पोहरी रोड़ पर आसानी से देखा जा सकता है जहां सरेआम बड़े-बड़े अस्पतालों के रूप में बिल्डिंगों में संचालित यह निजी अस्पताल शासन के ट्रैफिक के नियमों को धता बता रहे है तो वहीं दूसरी ओर नगर पालिका के नियम निर्देशों को भी हवा में उड़ा रहे है यहां रोड़ पर ही अतिक्रमण कर उसका उपयोग जनरेटरों को रखने के रूप में किया जा रहा है।

हालांकि बता दें कि इस ओर यातायात विभाग द्वारा कई बार कार्यवाही की गई और निजी अस्पताल संचालकों को निर्देश भी दिए गए कि वह रोड़ पर किसी तरह का अतिक्रमण ना करें बाबजूद इसके वह इससे बाज नहीं आते और कुछ समय बाद फिर से वही हालात उत्पन्न हो जाते है। ऐसे में यहां चालानी कार्यवाही होने के बाबजूद भी यह निजी अस्पताल अपने ही नियम कायदों पर काम करते हुए नजर आ रहे है। यातायाता और नगर पालिका के नियम निर्देशों को तो जैसे यह मानने इंकार ही कर देते है क्योंकि पोहरी का यह मुख्य मार्ग बस स्टेण्ड, रेल्वे स्टेशन से भी घिरा हुआ है जहां सर्वाधिक रूप से वाहनों की आवाजाही भी बनी रहती है।

एक ओर तो शहर में ही निजी अस्पताल का तमगा हासिल करने वाली बड़ी-बड़ी बिल्डिंगों में संचालित इन अस्पतालों के पास भले ही कोई सुविधा हो या ना हो लेकिन बड़ी बिल्डिंग में अस्पताल चलाकर वहां भर्ती कराए जाने वाले मरीज के नाम पर जरूर चांदी काटने में पीछे नहीं हंै। यहां बता दें कि सरकारी अस्पताल को छोड़कर मरीज इस कारण निजी अस्पतालों मेंं जाते है, जिससे उन्हें सुबिधा मिले और उनका पूरे प्रबन्ध के साथ इलाज हो सके, पर शिवपुरी शहर पोहरी रोड पर खुले अस्पताल ने इलाज की तो बड़ी लम्बी लिस्ट बना रखी है, लेकिन हम सुबिधा की बात करें तो सुबिधा देने में अभी बहुत कसर बाकी सी नजर आती है।

ट्रैफिक की बात करें तो पोहरी बस स्टैंड के बाद बड़े वाहन और अनेको मोटरसाइकिल का निकलना यहाँ से आमजन को बहुत मुश्किल में डालता है जिससे एक ओर जहां यातायात बाधित होता है तो वहीँ दूसरी ओर देखा जाये तो इन निजी अस्पतालों में पार्किंग की व्यवस्था भी कहीं दूर तक नजर नही आती, यदि सड़क माप की बात करें तो मुख्य सड़क के सेंटर से रोड का माप लिया जाए तो अस्पताल का जनरेटर भी इस हद में आता है। जिसे ध्यान में रखते हुए कहीं सड़क संकुचित ना हो जाए इसलिए यहां यातायात पुलिस द्वारा अपने वेरीकेट लगा रखे है बाबजूद इसके यह निजी अस्पताल प्रबंधन की मनमानियों पर पुलिस प्रशासन द्वारा कार्यवाही क्यो नही की जाती, यह समझ से परे है। क्योंकि अक्सर देखा गया है कि इस मार्ग पर वाहनों की अधिकता के कारण ट्रैफिक के कारण आने जाने वालों के साथ बड़ी दुर्घटना का कारण भी बन सकता है।

निजी अस्पताल में यदि कई शासकीय चिकित्सकों की सेवाओं पर गौर करें तो पता चलता है कि वह जिला चिकित्सालय और मेडीकल कॉलेज से संबंद्ध होकर शेष समय अपने घर पर मरीज देखने के लिए रखते है लेकिन यह सभी चिकित्सक अब अपने घर के बजाए निजी अस्पताल से ही ऑनकॉल सुविधा के रूप में सेवाऐं देने लगे है। यहां कोरोना महामारी का हवाला देकर कुछ डॉक्टर अपने घर पर न देखते हुए उन्हीं निजी अस्पतालों में अपनी सेवाऐं दे रहे है जहां ऑनकॉल के रूप में सुविधा दी जा रही है और इसके एवज में इनके काम के दाम अधिक दिए जा रहे है। घर पर कही कोरोना इन्हें और इनके परिवार को न लगे इस कारण इन डॉक्टरों ने उन मरीजो से दूरी बनाई। जिन मरीजो के कारण इन डॉक्टरों ने अपनी निजी अस्पताल शुरूआत की थी।

इनका कहना है-
निजी अस्पताल के द्वारा यातायात में बाधा पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है इस तरह की शिकायतें मिल रही है हम दिखवाते है कि लोगों को यातायात में परेशानी ना आए और यातायात को बहाल किया जाए।
रणवीर यादव, सूबेदार, यातायात प्रभारी, शिवपुरी

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