छत्तीसगढ़

बालाछापर और गुटरी में होगी चाय की खेती

रायपुर
राज्य में किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने के लिए ज्यादा लाभदायक फसल लेने के लिए उन्हें प्रेरित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने किसानों के हित कई अहम फैसले लिए हैं। वर्तमान कोरोना वायरस संक्रमण के कारण निर्मित हुई विषम परिस्थिति में राजीव किसान न्याय योजना से किसानों को खेती-किसानी के समय बड़ी राहत मिली है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के विभिन्न जिलों में किसानों को वहां के वातावरण के अनुरूप ज्यादा लाभदायक फसल लेने के लिए प्रेरित करने के साथ ही शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाने के निर्देश दिए हैं।

मुख्यमंत्री बघेल की मंशा के अनुरूप जशपुर जिले के ग्राम बालाछापर और गुटरी में चाय की खेती के लिए किसानों को प्रेरित किया जा रहा है। इन दोनों गांवो में चाय बागान की विकास के लिए तीन करोड़ 94 लाख रूपए स्वीकृत की गई है। जिले के जशपुर विकास खंड के ग्राम बालाछापर में चाय उत्पादन के लिए 9.11 हेक्टेयर एवं गुटरी में 11.9 हेक्टेयर भूमि चिन्हित की गई है। बालाछापर चाय बगान के लिए एक करोड़ 77 लाख रूपए एवं गुटरी के लिए 2 करोड़ 17 लाख की रूपए की स्वीकृति प्रदान की गई है। जशपुर कलेक्टर ने बताया कि जिले के किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए चाय की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। जशपुर के किसान मिर्च, काजू, लिची, चाय, काफी की अच्छी खेती करते हैं। दूसरे राज्यों में भी काजू, चाय, काफी की अच्छी मांग है। इसी को ध्यान में रखते हुए किसानों को चाय उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। चाय बागान के लिए स्वीकृत की गई राशि में मजदूरों को काम मिलेगा। स्वीकृत राशि में पौधा लगाने और गड्ढा खोदने के लिए बालाछापर चाय बागान के लिए 32 लाख रूपए एवं गुटरी के लिए 43 लाख 35 हजार रूपए की मजदूरी की राशि शामिल है।

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