राजनीतिक

बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर राज्य में राजनीतिक जोड़-तोड़ तेज

नई दिल्ली 
इस साल के आखिर में होनेवाले बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर राज्य में राजनीतिक जोड़-तोड़ तेज हो गई है। सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सबसे बड़े दल जदयू ने राज्य में अपनी ताकत बढ़ानी शुरू कर दी है। दूसरी तरफ भाजपा ने भी वर्चुअल रैलियों के जरिए जमीन मजबूत करने का अभियान छेड़ दिया है। एनडीए का तीसरा प्रमुख सहयोगी दल लोजपा है।

कोरोना काल में बिहार पहला राज्य होगा जहां विधानसभा चुनाव होंगे। हालांकि मौजूदा हालात में चुनाव प्रक्रिया को लेकर स्थिति साफ नहीं है। चुनाव आयोग भी लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है। लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रमुख विरोधी राजद के कई नेताओं को अपने साथ लाकर सामाजिक समीकरण और सत्तारूढ़ गठबंधन में अपनी ताकत बढ़ाने का काम शुरू कर दिया है। ऐसे में एनडीए के भीतर सीटों के तालमेल में जदयू बड़ा हिस्सा मांगेगा ही, लेकिन भाजपा और लोजपा के हिस्से में कितनी सीटें आएंगी, इसे लेकर कड़ी मशक्कत होने की संभावना है। 

राज्य में भाजपा ने भी अपनी ताकत बढ़ाई है और वह जदयू से कुछ ही कम सीटों पर तैयार होगी। लोजपा भी सामाजिक समीकरणों में संतुलन के हिसाब से अपने लिए अच्छी-खासी सीटें तलाश रही है। भाजपा के एक प्रमुख नेता ने कहा कि चुनाव के पहले एनडीए में कुछ और नए दल और नेता शामिल हो सकते हैं। ऐसे में एनडीए का कुनबा बढ़ने पर सीटों के बंटवारे को लेकर दिक्कतें बढ़ सकती है। पिछला विधानसभा चुनाव राजद और जदयू ने मिलकर लड़ा था तब से अब स्थितियां बदल चुकी है। 

नीतीश कुमार लौटकर एनडीए में आ चुके हैं और उनकी सत्ता बरकरार है। दूसरी तरफ लालू यादव के जेल में होने और बीमार होने से राजद की समस्याएं बढ़ी है। उनके परिवार में भी मतभेद उभरते रहे हैं, जिसका असर पार्टी पर भी पड़ा है। दूसरी तरफ नीतीश कुमार ने जदयू को मजबूत करने के साथ अपने विरोधियों को भी कमजोर किया है। पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने भी नीतीश कुमार को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं। 

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