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बिहार विधानसभा चुनाव: BJP के लिए 65 उपचुनाव भी बेहद अहम, MP में टिका है शिवराज सरकार का भविष्य

 नई दिल्ली 
भाजपा के लिए बिहार विधानसभा चुनाव के साथ होने वाले एक लोकसभा और विभिन्न राज्यों की 64 विधानसभा सीटों के उपचुनाव भी बेहद महत्वपूर्ण हैं। उसकी मध्य प्रदेश की सरकार का भविष्य तो इन उपचुनाव पर ही टिका हुआ है। राज्य की 27 सीटों पर उपचुनाव होने हैं, जिनमें भाजपा को सत्ता बरकरार रखने के लिए कम से कम नौ सीटें जीतना जरूरी है।

हाल में चुनाव आयोग द्वारा सभी लंबित उपचुनाव कराए जाने की बात कहे जाने पर इन राज्यों में भी राजनीतिक सक्रियता बढ़ गई है। सबसे ज्यादा राजनीतिक गहमागहमी भाजपा में है, क्योंकि कोरोना काल में उसके लिए देश के विभिन्न हिस्सों में होने वाले यह उपचुनाव एक राजनीतिक परीक्षण भी है कि जनता का मूड इन परिस्थितियों में किस तरह का है। वहीं विपक्ष भी इन हालात में अपने लिए जगह बनाने की कोशिश करेगा।

22 विधायकों के इस्तीफों से बनी थी भाजपा सरकार
सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण मध्य प्रदेश है, जहां 27 विधानसभा सीटों के लिए उपचुनाव होना है। इनमें 22 सीटें वे हैं जो कांग्रेस के 22 विधायकों द्वारा एक साथ इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल होने के कारण रिक्त हुई थीं। इसके फलस्वरूप राज्य में कांग्रेस की कमलनाथ सरकार का पतन हो गया था और भाजपा की शिवराज सिंह सरकार के गठन का रास्ता साफ हुआ था। इसके अलावा पांच और सीटों के उपचुनाव भी लंबित हैं। इनमें दो सीटों के उपचुनाव मौजूदा विधायकों के निधन के कारण होने हैं, जबकि तीन सीटें कांग्रेस के विधायकों के भाजपा की सरकार बनने के बाद इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल होने के कारण खाली हुई है।

कम से कम नौ सीटें जीतना जरूरी
मध्य प्रदेश के विधानसभा के आंकड़ों के अनुसार 230 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 116 पर होता है। अभी जबकि 27 सीटें खाली हैं, तब 203 के प्रभावी सदन में भाजपा 107 सीटों के साथ स्पष्ट बहुमत में है। कांग्रेस के 89 विधायक हैं। बसपा के दो, सपा के एक और निर्दलीय चार विधायक सदन में है। उपचुनाव के बाद जब सदन की प्रभावी संख्या फिर से 230 की हो जाएगी तब बहुमत का आंकड़ा फिर से 116 पर आ जाएगा। इसके लिए भाजपा को 27 में से नौ सीटें जीतना जरूरी है, जबकि कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत हासिल करने के लिए सभी 27 सीटों को जीतना जरूरी है। अगर भाजपा नौ सीट नहीं जीत पाती है तो उसे सपा, बसपा और निर्दलीय विधायकों की मदद लेनी पड़ सकती है। दूसरी तरफ कांग्रेस भी कम से कम 20 सीट जीतना चाहेगी, ताकि वह सपा, बसपा और निर्दलीयों की मदद से फिर से सत्ता में आ सके।

देश के सभी क्षेत्रों में होने हैं उपचुनाव
जिन अन्य राज्यों में विधानसभा सीटों के लिए उपचुनाव होने हैं, उनमें उत्तर प्रदेश और गुजरात की आठ-आठ सीटें, मणिपुर की पांच सीटें, असम, झारखंड, केरल, नगालैंड, तमिलनाडु और उड़ीसा की दो-दो सीटें, छत्तीसगढ़, हरियाणा, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल की एक- एक सीट शामिल है। इसके साथ ही बाल्मीकि नगर लोकसभा सीट का उपचुनाव भी होना है। भाजपा के लिए देश के विभिन्न हिस्सों के उपचुनाव इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इनसे कोरोना काल में जनता के मूड की एक झलक मिल सकती है।

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