राजनीतिक

बीजेपी में ज्योतिरादित्य सिंधिया को लाने का ‘इनाम’, यूपी से राज्यसभा जाएंगे जफर इस्लाम

लखनऊ
उत्तर प्रदेश की एक राज्यसभा सीट के लिए होने वाले उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने उम्मीदवार के नाम का ऐलान कर दिया है। पार्टी ने अपनी ओर से प्रवक्ता और मीडिया में चर्चित चेहर डॉ. सैयद जफर इस्लाम को उम्मीदवार बनाया है। जफर इस्लाम कई मौकों पर पार्टी के लिए रणनीतिक भूमिका निभा चुके हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया को कांग्रेस से बीजेपी में लाने में भी जफर इस्लाम की ही खास भूमिका रही है। यह सीट अमर सिंह के निधन से खाली हुई थी। अमर सिंह के निधन के बाद प्रदेश की इस एक सीट पर उपचुनाव कराए जा रहे हैं। उपचुनाव में जफर इस्लाम का निर्विरोध निर्वाचन तय है। प्रदेश में बीजेपी प्रचंड बहुमत के साथ सरकार में है, ऐसे में संभव है कि कोई और पार्टी उम्मीदवार भी ना उतारे। नामांकन और निर्वाचन की औपचारिक घोषणा के बाद वह यूपी से बीजेपी के एकमात्र मुस्लिम सांसद होंगे।

इन्वेस्टमेंट बैंकर रहे हैं जफर इस्लाम
जफर इस्लाम बीजेपी के प्रवक्ता हैं। टीवी चैनलों पर डिबेट में वह हर रोज बीजेपी का बचाव करते हैं। राजनीति में आने से पहले जफर इस्लाम एक विदेशी बैंक के लिए काम करते थे और लाखों रुपये का वेतन पाते थे। मोदी की राजनीति से प्रभावित होकर जफर इस्लाम ने बीजेपी से अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत की। माना जाता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जफर इस्लाम के अच्छे ताल्लुकात हैं। शायद यही वजह है कि मृदुभाषी और बेहद शालीन व्यक्तित्व के धनी जफर इस्लाम को बीजेपी ने केंद्र की राजनीति में मौका दिया है। मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया को कांग्रेस से तोड़कर बीजेपी में लाने के मामले में भी जफर इस्लाम की अहम भूमिका बताई जाती रही है। जफर इस्लाम पहले से ही ज्योतिरादित्य सिंधिया को जानते रहे हैं। सिंधिया को बीजेपी में लाने के लिए जफर इस्लाम ने खूब जोर लगाया और आखिर में सिंधिया के बलबूते ही बीजेपी ने मध्य प्रदेश में फिर से सरकार बना ली।

सिंधिया को बीजेपी में लाने में अहम भूमिका
कहा जाता है कि बीजेपी में शामिल होने की सिंधिया की पेशकश को जफर इस्लाम ने ही पार्टी आलाकमान तक पहुंचाया। इसके बाद ज्योतिरादित्य को बीजेपी में लाने की कवायद और मध्यप्रदेश में ‘ऑपरेशन लोटस’ की पटकथा लिखी गई। इस पूरे ऑपरेशन में बीजेपी की तरफ से सिर्फ लॉजिस्टिक और अन्य सहायता दी गई। पूरा ऑपरेशन ज्योतिरादित्य के मुताबिक ही चला था और कमलनाथ और कांग्रेस पार्टी देखती रह गई।

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