छत्तीसगढ़

बोधघाट परियोजना: प्रोजेक्ट तैयार करने सौंपा गया दायित्व

रायपुर
वर्षो से लंबित पड़ी सरकार की मत्वाकांक्षी बोधघाट परियोजना को अब क्रियान्वयन में लाने की प्रक्रिया ने जोर पकड?ा शुरू कर दिया है। इस परियोजना के सर्वेक्षण और विस्तृत प्रोजेक्ट तैयार करने का जिम्मा केन्द्र सरकार की एजेंसी वेबकास्ट को सौंप दिया है। इससे परे परियोजना के लिए अलग सर्किल की स्थापना के साथ-साथ चीफ इंजीनियर की पदस्थापना का भी प्रस्ताव है।

बस्तर की बोधघाट सिंचाई परियोजना का काम आगे बढ़ रहा है। केन्द्रीय जल आयोग ने अपनी सैद्धांतिक सहमति दे दी है। राज्य सरकार के प्रयासों का नतीजा यह रहा है कि केन्द्रीय जल आयोग ने बोधघाट परियोजना के लिए प्री फिजिबिलिटी रिपोर्ट (प्रारंभिक साध्यता प्रतिवेदन) को अपनी सहमति दे दी है। आयोग की सहमति के बाद परियोजना के सर्वेक्षण और विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने का काम शुरू हो गया है।

राज्य सरकार ने केन्द्र सरकार की एजेंसी वेबकास्ट को डीपीआर तैयार करने का जिम्मा दिया है। यही नहीं, परियोजना को मूर्त रूप प्रदान करने के लिए अधिकारी-कर्मचारियों की पदस्थापना भी की जा रही है।  सूत्रों के मुताबिक एक अलग से सर्किल बनाने का प्रस्ताव है। साथ ही साथ यहां चीफ इंजीनियर की पदस्थापना की जाएगी। विभागीय सूत्रों के मुताबिक बोधघाट परियोजना के लिए पर्यावरण स्वीकृति को लेकर कार्रवाई की जा रही है। पहले डुबान क्षेत्र में आने वाले वनों के एवज में क्षतिपूर्ति के रूप में वनीकरण की योजना थी। उस समय करीब 6 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में वनीकरण हो चुका है। बावजूद इसके परियोजना रोक दी गई थी।

यह परियोजना सिंचाई परियोजना इंद्रावती नदी पर प्रस्तावित है। यह दंतेवाड़ा जिले के विकासखंड गीदम के ग्राम बारसुर से लगभग 8 किलोमीटर और जगदलपुर जिला मुख्यालय से सौ किलोमीटर की दूरी पर है। इस परियोजना की अनुमानित लागत 22 हजार 653 करोड़ रुपए है। इससे लगभग 3 लाख 66 हजार 580 हेक्टेयर में सिंचाई प्रस्तावित है। बोधघाट परियोजना से बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर जिले में सिंचाई होगी।

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