भोपालमध्यप्रदेश

भाजपा के अंदर दबाव की राजनीति अपने चरम पर, मंत्रिमंडल विस्तार के आठ दिन बाद भी विभागों का बंटवारा नहीं

भोपाल
विभागों के बंटवारा न होने के चलते बजट को लेकर शिवराज सिंह चौहान मंत्रिमंडल की बैठक में इस पर चर्चा नहीं हो पा रही है। 20 जुलाई से प्रदेश में विधानसभा का सत्र है। जिसमें प्रदेश का बजट प्रस्तुत होगा। ऐसे में वित्त विभाग की कमान किसे मिलेगी यह तय नहीं होने के चलते बजट को लेकर भी पुख्ता चर्चा नहीं हो पा रही है।

शिवराज सिंह चौहान मंत्रिमंडल का विस्तार दो जुलाई को हुआ था। तब यह माना जा रहा था कि एक-दो दिन में मंत्रियों के बीच में विभागों को बंटवारा हो जाएगा, लेकिन विभागों को बांटने में भाजपा को पसीना आ रहा है। इस बीच मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान दिल्ली में भी मंत्रियों के विभागों को लेकर चर्चा कर आए, लेकिन नतीजा अब तक सामने नहीं दिखाई दिया। आज फिर से शिवराज सिंह चौहान और भाजपा के अन्य नेताओं के बीच फोन पर विभागों को लेकर चर्चा होगी। चर्चा सफल रही तो मंत्रियों को प्रभार आज शाम तक मिल जाएगा, यदि चर्चा पूर्व की तरह बिना निर्णय की रही तो विभागों का बंटवारा टल सकता है।

मंत्रिमंडल विस्तार के आठ दिन बाद भी मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा नहीं हो सका है। प्रदेश में ऐसी स्थिति संभवत: पहली बार बनी है, जब मंत्रिमंडल के विस्तार के बाद इतने दिनों तक मंत्री बिना विभाग के किसी सरकार में काम कर रहे हैं। इसके साथ ही भाजपा के अंदर दबाव की राजनीति अपने चरम पर पहुंच गई है। संगठन और नेताओं के बीच चल रही रस्साकसी के चलते ही विभागों के बंटवारे में खासी मशक्कत हो रही है। ऐसा माना जा रहा है कि यदि आज की चर्चा सफल रही तो जल्द ही विभागों का बंटवारा मंत्रियों के बीच हो जाएगा।

वहीं भाजपा में इस वक्त चौतरफा दबाव की राजनीति चल रही है। ऐसा माना जा रहा है कि मंत्रियों के विभागों के लिए संगठन और नेता अलग-अलग मशक्शत कर रहे हैं। इस सबके बीच भाजपा के राष्टÑीय नेतृत्व बिना विवाद के मंत्रियों के बीच विभागों के बंटवारे का रास्ता भी खोज रहा है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दिल्ली से भोपाल आते ही कहा था कि वर्कआउट करने के बाद वे मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा कर देंगे। बताया जाता है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपने अनुसार मंत्रियों के बीच में विभागों को बंटवारा करना चाहते हैं। जनता से  सीधे जुड़े कुछ विभागों की जिम्मेदारी वे अपने करीबियों को देना चाहते हैं। साथ ही उनके काम में भी आसानी रहे। उन्होंने अपनी राय से दिल्ली के नेताओं को अवगत करा दिया है।

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