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भारतीयों पर पड़ेगी एच-1बी वीजा के निलंबन की सबसे ज्यादा मार 

 नई दिल्ली 
अमेरिका में एच-1बी वीजा के निलंबन की घोषणा से सबसे बड़ा झटका भारतीयों को ही लगेगा। जानकारों का कहना है कि इसका 70 फीसदी से ज्यादा उपयोग भारतीय अपनी प्रतिभा के बूते करते हैं। लेकिन नए आदेश से उनके लिए अमेरिका में मौके कम होंगे। साल भर में दिए जाने वाले 85,000 एच 1 बी वीजा में से 70 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी भारतीयों की थी। इस श्रेणी में दो लाख से ज्यादा आवेदन हर साल होते हैं। लेकिन 85 हजार को ही वीजा मिलता है।

कई अन्य श्रेणियों में भी वीजा निलंबन का झटका भारतीयों को झेलना पड़ेगा। जानकारों का कहना है कि एच-1बी वीजा धारक के पत्नी, आश्रितों को ग्रीन कार्ड मिलने तक वर्क परमिट की सुविधा भी अधर में पड़ जाएगी।जानकारों का कहना है कि अभी  एच – 1 बी वीजा का निलबंन दिसम्बर तक है। भारत इस फैसले की समीक्षा और भारतीयों के हित का मसला जरूर अमेरिका के सामने उठाएगा। लेकिन निलंबन स्थायी किया गया तो इसका बहुत दूरगामी असर भारतीयों पर होगा।

चुनाव के मद्देनजर फैसला

पूर्व विदेश सचिव शशांक का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावी मूड में हैं। उन्होंने अमेरिकन नागरिकों और खासतौर पर अफ्रीकी अमेरिकन को एक संदेश देने की कोशिश की है। उन्होंने कहा भारतीयों का अमेरिका की प्रगति में बहुत योगदान है। जो लोग अमेरिका में रह रहे हैं उनपर क्या असर होगा देखना पड़ेगा, शायद वे बहुत प्रभावित न हों। लेकिन जो लोग बाहर आ गए हैं उन्हें दोबारा जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। नए अवसरों में कमी आ सकती है। आगे क्या होता है इसपर नजर रखना होगा।

 प्रवासी नागरिकों का बढ़ेगा संकट

सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रपति ट्रंप अमेरिकन फर्स्ट की बात करते हैं। इस फैसले से वे अमेरिकी लोगों के लिए रोजगार उपलब्ध कराने का दावा करेंगे। फिलहाल अनुमान लगाया जा रहा है कि इससे पांच लाख से ज्यादा अमरीकियों को रोजगार मिलेगा। लेकिन पहले से बेरोजगारी संकट का सामना कर रहे प्रवासी लोगों का संकट और गहरायेगा।

 पिछले कई महीने से सख्त हैं ट्रंप

ट्रंप सरकार ने पिछले कई महीने से एच -1 बी वीजा के मामले पर भी सख्त रवैया अपनाया है। इस वीजा के लिए आवेदन खारिज होने के मामले पिछले कुछ वक्त में बढ़े हैं। नेशनल फाउन्डेशन फॉर अमेरिकन पॉलिसी के मुताबिक साल 2019 की तीसरी तिमाही में एच -1 बी वीजा के 24 फीसदी नए मामलों को मंजूरी नहीं दी गयी थी। राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा जारी आधिकारिक घोषणा के मताबिक नए प्रतिबंध 24 जून से प्रभावी होंगे। इस आदेश का हजारों भारतीय आईटी पेशेवरों और कई अमेरिकी एवं भारतीय कंपनियों पर प्रभाव पड़ सकता है जिन्हें अमेरिकी सरकार ने एक अक्तूबर से शुरू हो रहे वित्त वर्ष 2021 के लिए एच-1बी वीजा जारी कर दिए थे। हालांकि, ट्रंप के इस फैसले का गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों, अमेरिकी विशेषज्ञों और सांसदों ने विरोध करना शुरू कर दिया है।

 गलत दिशा में उठाया गया कदम: नास्कॉम

भारतीय सॉफ्टवेयर उद्योग के संगठन नास्कॉम ने मंगलवार को अमेरिका द्वारा कार्य वीजा को निलंबित किये जाने की घोषणा को 'गलत दिशा में उठाया गया कदम बताया। संगठन ने कहा कि यह कदम अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिये नुकसानदेह साबित होगा। नास्कॉम का कहना है कि अमेरिका के इस कदम से संभवत: और ज्यादा काम विदेशों में होने लगेगा क्योंकि वहां स्थानीय स्तर पर इस तरह का कौशल उपलब्ध नहीं हैं। 

गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने जताई निराशा

सर्च इंजन गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने एच-1बी वीजा तथा अन्य विदेश कार्य वीजा पर अस्थाई रोक संबंधी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर निराशा व्यक्त की और कहा कि वह आव्रजकों के साथ हैं और सभी के लिए अवसर पैदा करने के लिए काम करेंगे। ट्रंप की ओर से घोषणा जारी होने के बाद भारतीय-अमेरिकी पिचाई ने ट्वीट किया, आव्रजन ने अमेरिका की आर्थिक सफलता में बहुत योगदान दिया है और प्रौद्योगिकी में उसे वैश्विक नेतृत्वकर्ता बनाया है, साथ ही गूगल को ऐसी कंपनी बनाया है जो वह आज है।

अमेरिका सांसदों ने फैसला वापस लेने को कहा

अमेरिका के शीर्ष सांसदों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से एच-1बी वीजा तथा अन्य गैर आव्रजक वीजा पर लगाई गई अस्थाई रोक को हटाने की अपील की है। भारतीय अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने कहा, मैं इस अहम कार्य वीजा कार्यक्रम पर रोक वाले ट्रंप के गलत तथ्यों से प्रेरित आदेश से बेहद निराश हूं। मैं यह सुनिश्चत करने के लिए उनसे इस आदेश को पलटने का अनुरोध करता हूं। डेमोक्रेटिक पार्टी के सचेतक डिक डरबिन, सांसद बिल पास्क्रिल और रो खन्ना ने भी ट्रंप के इस कदम को गलत ठहराया है। सांसद डोना ई शलाला ने कहा कि ट्रंप अब अमेरिकी कारोबार पर हमला कर रहे हैं और अर्थव्यवस्था की बहाली खतरे में डाल रहे हैं। उन्होंने कहा, अमेरिका इससे ज्यादा गरीब और कम प्रतियोगी बनेगा।

विदेशी प्रतिभाएं अमेरिका की ताकतः विशेषज्ञ

लीडरशिप कॉन्फ्रेंस ऑन सिविल एंड ह्यूमन राइट्स’ की अध्यक्ष एवं सीईओ वनीता गुप्ता ने ट्रंप प्रशासन के इस कदम की निंदा की है। उन्होंने कहा कि नवीनतम यात्रा प्रतिबंध डोनाल्ड ट्रंप और स्टीफन मिलर द्वारा शुरू किए गए नस्ली और विदेशी विरोधी भावना का एक नया संस्करण है। ट्रंप प्रशासन में दक्षिण और मध्य एशिया के लिए प्रमुख राजनयिक रहीं एलिस जी वेल्स ने भी इस कदम का विरोध किया है। उन्होंने कहा, एच1-बी वीजा कार्यक्रम के जरिए सर्वश्रेष्ठ और उत्कृष्ट को आकर्षित करने की क्षमता ने अमेरिका को अधिक सफल और लचीला बनाया है। विदेशी प्रतिभाओं को बांधने की कला जानना अमेरिका की ताकत है कमजोरी नहीं।
  

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