बिहारराज्य

 भारतीय जवान किसी देश की सेना को धूल चटा सकते हैं: पूर्व सैनिकों 

 पटना 
भारत-चीन सीमा पर कुछ दिनों से तनाव है। करीब 50 साल बाद एलएसी पर भारत-चीन सैनिक एक बार भी आमने सामने आ गए हैं। जिसको लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। इस संदर्भ में चीन सीमा पर ड्यूटी कर चुके भारतीय पूर्व सैनिकों ने अपनी बातें रखीं।

लद्दाख क्षेत्र में भारत-चीन के बीच गतिरोध और ताजा हालात पर आईटीबीपी के पूर्व अपर महानिदेशक आरके मिश्र का कहना है कि चीन हमेशा से भारतीय क्षेत्र पर कब्जे की मंशा रखता है। चीन के साथ विवाद की वजह यही है। लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक हजारों किलोमीटर की चीन से लगी सीमा को वास्तविक नियंत्रण रेखा कहा जाता है। भारत और चीन के बीच विवाद का बड़ा कारण चीन की विस्तारवादी मंशा है।

उन्होंने कहा कि ताजा विवाद चीन की ओर से जानबूझकर पैदा किया गया है। पेंगॉन्ग झील से सटे इलाके में चीन पहले ही सड़क का निर्माण कर चुका है। भारत अपने क्षेत्र में सड़क बना रहा है पर चीन ऐसा नहीं होने देना चाहता। लद्दाख में गतिरोध का कारण यही है। चीन ऐसा इसलिए करता है, ताकि जरूरत पड़ने पर उसकी सेनाएं तुरंत पहुंच जाए, पर भारत ऐसा नहीं कर पाए। उन्होंने कहा कि चीन से लगी हजारों किलोमीटर की सीमा पर हमारे 80 प्रतिशत सुरक्षा पोस्ट निर्णायक ऊंचाई वाले स्थान पर हैं। चीन के पास ऐसा 20 प्रतिशत क्षेत्र ही है जहां वह हमसे ज्यादा उंचाई पर मौजूद है। बावजूद युद्ध से कुछ हासिल नहीं होगा। दोनों देशों को चाहिए कि गतिरोध को सुलझाने के लिए बातचीत करें। 

भारतीय सेना किसी सेना को धूल चटा सकती  
अरुण कुमार सिंह उर्फ फौजी 1992-93 में भारत-चीन सीमा के गुरुबथान, नथुला व कुपुप में पदस्थापित थे। इस इलाके में 10-20 किलोमीटर पर 20-25 घरों का गांव है। कुपुप में 50 मीटर की दूर पर दोनों देश के सैनिक रहते थे। सीमा रेखा के रूप में एक दो कटीले तार हुआ करते थे। 

आत्मबल का मुकाबला नहीं 
1962 के युद्व में जांगला टोप के पास चीनी सेना के साथ आरडी सिंह ने मोर्चा संभाला था। उन्होंने बताया कि भारतीय सैनिकों ने शौर्य, बल व पराक्रम के साथ चीनी सैनिकों का सामना किया था। उस समय भारतीय सैनिकों के पास सामान की बहुत ही कमी थी। बावजूद चीनी सैनिकों को ढेर किया था।

हमारी सेना के पास सबकुछ
1962 में भारत-चीन में हुए युद्ध के योद्धा एसएन सिंह ने बताया कि उस युद्ध में चीनी सेना ने भारतीय सेना पर पीछे से पूरी प्लानिंग के साथ वार किया था। तीन चार टुकड़ियों में बंटे चीनी सैनिक हमला कर रहे थे, ताकि संभलने का मौका नहीं मिले पर भारतीय बहादुरी के साथ सामना किए।

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