बिहारराज्य

भारत-चीन के बीच हिंसक झड़प: चुकाया माटी का कर्ज, हंसते-हंसते शहीद हो गए बिहार के जवान

 पटना 
आज बिहार फिर फ्रख महसूस कर रहा है। देश की खातिर हमारे चार जवान हंसते-हंसते शहीद हो गए। भारत-चीन के बीच हिंसक झड़प में अपनी जान की बाजी लगा दी। सारण के परसा के सुनील, चंचौरा के संजय, भोजपुर के कुंदन ओझा, सहरसा के कुंदन कुमार ने वीरगति प्राप्त की। 

सारण के सुनील की मौत की खबर जैसे ही घर पहुंची, माहौल गमगीन हो गया। आस-पास के गांव की महिलाएं सुनील के घर पहुंच गई और उनकी पत्नी चन्द्रावती को ढांढस बढ़ाते हुए कहा कि तहार सुहाग नइखे उजरल, देश के सुरक्षा के तिलक बा। महिलाओं ने कहा कि भारत माता की रक्षा के लिए चंद्रवती का सिंदूर काम आएगा। एक सुनील के शहीद होने से कई सुनील स्वत: पैदा हो जाएंगे। महिलाओं ने यह भी कहा कि देश की रक्षा के लिए हम सबों का बेटा सुनील  चीन को सबक सिखाते हुए अमरत्व को पाया है। गांव की महिला सुनीता देवी ने कहा कि भारत माता की सुहाग की रक्षा के लिए सुनील की पत्नी का सुहाग भले ही उजड़ गया हो पर पूरा क्षेत्र गौरवान्वित है। सुनील ने बहादुरी का परिचय देते हुए चीनी सैनिकों को खदेड़ने का काम किया। सुनील की बहादुरी के किस्से स्वर्णिम अक्षरों में अंकित होगा। वही पत्नी बार-बार बेहोश हो जा रही थी। बेहोश पत्नी को संभालते हुए गांव के लोग चीन को सबक सिखाने की भी बात कह रहे थे। बुजुर्ग मां चंद्रावती देवी दहाड़ मार कर रो रही थी। उसे समझ में नहीं आ रहा था कि अब बुढ़ापे की लाठी कौन बनेगा।  

बचपन से ही फुटबॉल प्रेमी थे सुनील  
सारण के परसा के सुनील फुटबॉल प्रेमी थे। वह गांव आने पर फुटबॉल जरूर खेलता थे। बचपन से ही वह फुटबॉल के शौकीन थे। उनके अजीज मित्रो में शामिल रघु राय, भूषण कुमार व अरुण कुमार ने बताया कि वे व्हाट्सएप और मैसेंजर पर हमेशा बॉर्डर का लाइव दिखाते रहते थे। रोज एक बार जरूर फोन से बात करता थे। 

गांव की मिट्टी से था प्यार
छोटा भाई इंजीनियर अनिल कोलकाता में होटल चलाता है। उसके मित्र रघु ने बताया कि उसकी नौकरी 17 साल हो चुकी थी इसलिए एक साल और नौकरी कर छोड़ने का निर्णय ले लिया था। गांव घर के लोगो के जेहन में वह हमेशा रहता था क्योंकि उसे गांव की मिट्टी से ज्यादा प्यार था।

मां- पत्नी का बुरा हाल
सुनील की माता चंद्रावती देवी, पत्नी मेनका देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। सुनील को तीन वर्ष की पुत्री रौशनी कुमारी है। वह सबको रोते हुए देखकर भी नहीं समझ पा रही कि आखिर घर वाले रो क्यों रहे हैं। मां की गोद से सिमटकर वह चुपचाप सबको एकटक देख रही है। 

बेटी संग बर्थडे मनाने का सपना रह गया अधूरा
तीन साल की बिटिया रौशनी को कुछ समझ में नहीं आ रहा है कि क्या हो गया है। वह बार-बार अपनी मां को  निहार रही है और चुपचाप बैठी है । उसका सपना भी अब अधूरा ही रह गया। पापा के साथ बर्थडे मनाने का सपना। लॉकडाउन के पहले घर आए सुनील ने बिटिया को जाते समय  माथा चूम कर बोले  थे कि बर्थडे में जरूर आऊंगा। घर के लोगों ने बताया कि चार दिन पहले वीडियो कॉलिंग से जब सुनील अपनी मां व पत्नी से बात कर रहा था तभी बिटिया रानी को भी बहुत मिस कर रहे थे।  

रो पड़ा दिघरा गांव
लेह लद्दाख में पोस्टेड सेना के जवान सुनील कुमार की शहादत की खबर जैसे ही दिघिरा गांव में फैली कि पूरा गांव सन्न रह गया। सुनील गांव में सबके चहेते थे। युवाओं में वे काफी लोकप्रिय थे। गांव में जब भी आते, खेल व खिलाड़ियों से उनका हमेशा वास्ता बना रहता था। मां व पत्नी विलाप कर रही थीं तो उन्हें संभालने वाले परिजन ही थे। सुनील के भाई अनिल कोलकाता में फिलहाल हैं तो रिटायर्ड फौजी पिता बैंक में ड्यूटी के सिलसिले में जबलपुर में हैं।  

भोजपुर के कुंदन की 20 दिन पहले हुई थी बेटी
भोजपुर का एक वीर सपूत देश की रक्षा करते चीन के हमले में शहीद हो गया। शहीद जवान मूल रूप से जिले के बिहिया थाना क्षेत्र के पहरपुर गांव के रहने वाले रविशंकर ओझा के 28 वर्षीय पुत्र कुंदन ओझा थे। उनका परिवार करीब तीस साल से झारखंड राज्य के साहेबगज में रह रहा है। वहीं मंगलवार की शाम बेटे की शहादत की खबर मिलते ही गांव का माहौल गमगीन हो उठा। वहीं कुंदन के पैतृक घर में भी कोहराम मच गया। कुंदन अपने पहले बच्चे को देखने से पहले ही शहीद हो गये। इससे गांव व घर के लोग काफी मर्माहत हैं। बताया जाता है कि किसान रविशंकर ओझा के पुत्र कुंदन ओझा की करीब दस साल पहले नौकरी लगी थी। महज दो साल पहले उनकी शादी हुई थी और बीस रोज पहले बच्ची हुई थी। घर में पहली बेटी होने को लेकर काफी खुशी थी। जानकारी के अनुसार कुंदन ओझा तीन भाइयों में मांझिल थे। इनमें कमाने वाले सिर्फ कुंदन ही थे। उनके चाचा धर्मनाथ ओझा आरा में वकील हैं। ग्रामीण प्रवीण रंजन ओझा उर्फ पिंटू ओझा बताते हैं इनके परिवार के लोग तीस वर्ष पहले से ही झारखंड राज्य के साहेबगंज जिले के बिहारी ग्राम में रहते है। कुंदन व उनके परिवार के लोग शादी-विवाह सहित अन्य फंक्शन में गांव आते रहते हैं।

सहरसा के आरण के लाल ने भी दी शहादत
मंगलवार की देर रात भारत-चीन सीमा पर सहरसा जिले की विशनपुर पंचायत के आरण गांव के एक वीर कुंदन कुमार के शहीद होने की सूचना मिली है। सूचना मिलने के बाद गांव के लोग स्तब्ध हैं। परिजनों ने खबर की पुष्टि करते हुए कहा कि फोन से सूचना मिली है। उसके बाद हर कोई समाचार सुनने के लिए टीवी सहित अन्य श्रोत से जानकारी इकठ्ठे करने में जुट गये। 

बताया जाता है कि आरण गांव निवासी निमिन्द्र यादव के पुत्र कुन्दन सेना में बहाल थे। उनकी शादी मधेपुरा जिले के घैलाढ़ थाने के इनरबा गांव में बेबी कुमारी से हुई थी। कुंदन को दो पुत्र (6 एवं 4 वर्ष) का है। जानकारी प्राप्त होने के बाद उनके घर पर लोग जुटने लगे।  

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