भोपालमध्यप्रदेश

मंत्रियों के नाम तय होने से बढ़ी दावेदारों की बेचैनी, पहली बार मौका पाने वाले खुश

भोपाल
शिवराज कैबिनेट के विस्तार का दिन तय होने के बाद अब मंत्री बनने के लिए जोर लगाने वाले विधायकों में बेचैनी है। मंत्री पद के लिए दावेदारी करने वाले नेताओं को अब जीएडी और सीएम सचिवालय से बुलावे का इंतजार है। सबसे ज्यादा बेचैनी केंद्रीय संगठन के 50-50 के फार्मूले में फंसने से मंत्री पद से दूर होने वाले उन पूर्व मंत्रियों में है जिनका नाम मंत्री पद की सूची से किसी न किसी बहाने कट सकता है। ऐसे विधायकों ने दिल्ली में मौजूद अपने आकाओं के जरिये अंतिम दौर तक नाम जुड़वाने के लिए पूरी ताकत झोंक रखी है। वहीं पहली बार मंत्री पद का मौका मिलने की आस लिए नेता संगठन के फैसले की सराहना कर रहे हैं।

 इनका मंत्री बनना तय
कांग्रेस से बगावत कर भाजपा ज्वाइन करने वाले पूर्व विधायकों और मंत्रियों में सिंधिया के खास समर्थकों का मंत्री बनना तय है। इसमें से तुलसी सिलावट और गोविन्द सिंह राजपूत मंत्री बन चुके हैं। अब दस नए बनने वाले मंत्रियों में प्रद्युम्न सिंह तोमर, डॉ प्रभुराम चौधरी, इमरती देवी, महेंद्र सिंह सिसोदिया, राजवर्द्धन सिंह दत्तीगांव, बिसाहू लाल सिंह, हरदीप डंग, एदल सिंह कंसाना, रणवीर जाटव     और बृजेन्द्र सिंह यादव के नाम हैं।

 इनको मिल सकता है बीजेपी से मौका
 मार्च में कमलनाथ सरकार के इस्तीफे के पूर्व पार्टी के लिए महत्वपूर्ण रोल अदा करने वाले अरविन्द भदौरिया, संजय पाठक का मंत्री बनना तय माना जा रहा है। इनके अलावा भाजपा से अब तक मंत्री न बनने वाले तीन से चार बार के जिन विधायकों को मौका मिल सकता है, उसमें रमेश मेंदोला, उषा ठाकुर, मालिनी गौड़ में से कोई एक, अरविन्द भदौरिया, चैतन्य कश्यप, यशपाल सिंह सिसोदिया, गिरीश गौतम, केदार शुक्ल, प्रेम सिंह पटेल, प्रदीप लारिया, रामखिलावन पटेल, मोहन यादव, रामेश्वर शर्मा, विष्णु खत्री, अशोक रोहाणी के नाम शामिल हैं।

 पूर्व मंत्रियों में कुछ को ही मिलेगा मंत्री पद
 शिवराज सरकार में मंत्री रह चुके जिन पूर्व मंत्रियों में से पचास फीसदी को ही पार्टी इस बार मौका देने वाली है, उसमें गोपाल भार्गव, भूपेंद्र सिंह, रामपाल सिंह, राजेंद्र शुक्ल, नागेंद्र सिंह नागौद, विजय शाह, गौरीशंकर बिसेन,  विश्वास सारंग, संजय पाठक के नाम शामिल हैं। इसके अलावा जगदीश देवड़ा, करण सिंह वर्मा, अजय विश्नोई,

इस्तीफे की भी धमकी
इस बात की भी चर्चा है कि केंद्रीय नेतृत्व ने शिवराज कैबिनेट में मंत्री रह चुके सीनियर विधायकों को इस बार मंत्री पद नहीं देने का फैसला किया तो कई पूर्व मंत्रियों ने इसका विरोध किया। चूंकि वे अभी विधायक हैं, इसलिए चर्चा यह भी है कि इन नेताओं ने संगठन को साफ कह दिया है कि अगर उन्हें मंत्री नहीं बनाया गया तो वे इस्तीफा दे देंगे। बताया जाता है कि पांच पूर्व मंत्रियों के इस्तीफे की धमकी के बाद केंद्रीय संगठन कुछ नरम पड़ा है क्योंकि ऐसे हालात बने तो सरकार के गिरने का खतरा बन जाएगा। 24 सीटों के लिए चुनाव की प्लानिंग कर रही सरकार को पार्टी विधायकों की बगावत के कारण और अधिक उपचुनाव के लिए संघर्ष करना पड़ा तो दिक्कत होना तय है।

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