छत्तीसगढ़

मंत्री के तेवर से बस संचालक ढीले पड़े,नहीं बढ़ेगा भाड़ा

रायपुर। बस संचालन को नियमों के दायरे में संचालित करने राज्य सरकार ने पहले ही आदेश जारी कर दिया है। इस बीच नुकसान को कम करने सरकार ने टैक्स भी इस अवधि के माफ कर दिए हैं। लेकिन केन्द्र सरकार ने डीजल की कीमत बढ़ा दी। बस संचालकों की कुछ लंबित मांगे भी थी। जिसे लेकर वे संचालन में असमर्थतता जताते हुए किराया भाड़ा बढ़ाने की मांग कर दी। बातचीत का कई दौर हो चुका है लेकिन दोनों पक्ष में सहमति न बनने के बीच कल कुछ लोगों ने कह दिया कि समझौता हो गया है,रविवार से बस चलने लगेगी। आज फिर परिवहन मंत्री मो.अकबर की बात सामने आ गई है कि कोरोना के चलते लोगों की आर्थिक स्थिति पहले ही खराब है ऐसे में बस किराया बढ़ाया जाना उचित नहीं होगा। अभी संकट में बस संचालक साथ दें,आगे विचार किया जायेगा। यदि नहीं चलाने की जिद पर अड़ें रहेंगे तो सरकार कोई दूसरा विकल्प भी तलाशेगी। मंत्री के तेवर से अब संचालक कुछ ढीले पड़ गए हैं।
अनलॉक-1 की घोषणा होने के बाद राज्य सरकार ने पूरे प्रदेश में जून के अंतिम सप्ताह में सोशल डिस्टेंसिंग और गाइडलाइन का पालन करते हुए बस संचालन करने की अनुमति दी। राज्य सरकार द्वारा बस संचालन करने की अनुमति मिलने के बाद बस संचालक डीजल की कीमत बढ?े और सवारी नहीं मिलने की बात कहते हुए किराया भाड़ा में बढ़ोतरी करने के बाद ही बस संचालित करने की बात कही। साथ ही किराया भाड़ा में वृद्धि नहीं होने की स्थिति में बस संचालन करने में असमर्थता जताई।
परिवहन मंत्री के मुताबिक लॉकडाउन में बसों का संचालन नहीं होने से बस आॅपरेटरों को नुकसान से उबारने अप्रैल से जून तक तीन माह का पहले ही टैक्स माफ कर दिया है। श्री अकबर के अनुसार कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन के कारण पहले से ही लोगों के हाथ खाली हैं, इस स्थिति में बस भाड़ा में वृद्धि करना किसी भी स्थिति में उचित नहीं है। परिवहन मंत्री ने बस संचालकों से इस महामारी के समय में बस किराया की जिद छोड़ बस संचालन करने की अपील की है।
साफ तौर पर कह दिया है कि बस आॅपरेटरों की बेजा मांग को सरकार नहीं मानेगी। बस आॅपरेटरों के जिद पर अड़े रहने की स्थिति में राज्य में यात्री सेवा बहाल करने परिवहन मंत्री ने वैकल्पिक व्यवस्था करने की बात कही है। जिन बस मालिकों को बस परिचालन करने में परेशानी हो रही है, वे एम तथा के फार्म जमा कर अपनी बसों को खड़ी कर सकते हैं। इससे उन्हें रोड टैक्स भी नहीं देना पड़ेगा, साथ ही उन्हें बस संचालन से होने वाले आर्थिक नुकसान का भार नहीं सहना पड़ेगा।

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