राजनीतिक

महागठबंधन के सभी दाल आरजेडी से नाराज

पटना
महागठबंधन में कोऑर्डिनेशन कमेटी बनाने की मांग हम प्रमुख जीतन राम मांझी द्वारा पिछले साल से ही की जा रही है, लेकिन आरजेडी ने माझी की मांग को कोई तवज्जो नहीं दी। लिहाजा मांझी ने 25 जून तक महागठबंधन में कोआर्डिनेशन कमेटी बनाने की बनाने का अल्टीमेटम दिया था लेकिन मांझी की यह डेट भी फेल हो गई।

कांग्रेस ने कोऑर्डिनेशन कमेटी बनाने का किया था प्रॉमिस
जीतन राम मांझी के 25 जून तक का महागठबंधन में कोआर्डिनेशन कमेटी बनाने की मांग के अल्टीमेटम के बाद कांग्रेस ने मांझी को प्रॉमिस किया था कि एक सप्ताह के भीतर कोआर्डिनेशन कमेटी बना दी जाएगी। बता दें कि 24 जून को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की पहल पर महागठबंधन की वर्चुअल बैठक बुलाई गई थी। जिसमें घटक दलों ने आरजेडी के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली थी। इसी बैठक में कांग्रेस ने मांझी को आश्वस्त किया था कि 31 जुलाई तक कोआर्डिनेशन कमेटी बना दी जाएगी। लेकिन आज तक ऐसा कुछ नहीं हुआ और ना ही आने वाले समय में कोऑर्डिनेशन कमेटी की किसी तरह की कोई चर्चा होगी ऐसा दिख रहा है।

'हम' के कोर कमेटी की बैठक में क्या हुआ था फैसला
महागठबंधन के वर्चुअल बैठक के दौरान कोऑर्डिनेशन कमेटी को लेकर कांग्रेस के आश्वासन के दूसरे दिन हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा की कोर कमेटी की बैठक बुलाई गई थी। 26 जून को हुए कोर कमेटी की बैठक में यह फैसला लिया गया कि कांग्रेस ने एक सप्ताह का समय मांगा है अगर समय पर कोआर्डिनेशन कमेटी नहीं बनती है तो पार्टी प्रमुख जीतन राम मांझी जो भी फैसला लेंगे पार्टी के सभी लोग उस फैसले का के साथ रहेंगे। बता दें कि जीतन राम मांझी लगातार यह कहते रहे हैं कि महागठबंधन में शामिल सभी घटकों की बात होनी चाहिए कोई एक पार्टी महागठबंधन के लिए निर्णय नहीं ले सकता। इसलिए जरूरी है कि कोऑर्डिनेशन कमिटी की का निर्माण हो ताकि सभी पार्टियां अपनी अपनी बात वहां रख सके और चुनाव की रणनीति तैयार की जा सके।

10 जुलाई तक खामोश रहेंगे जीतन राम मांझी
सत्ता के गलियारे में अब यह चर्चा आम हो चली है कि जीतन राम मांझी महागठबंधन छोड़ सकते हैं हालांकि पार्टी की तरफ से इस तरह की बातों को मात्र अफवाह बताया जा रहा है। लेकिन मांझी के रुख को देखते हुए अनुमान लगाया लगाया जा रहा है कि आने वाले समय में वह एक बड़ा फैसला ले सकते हैं। पार्टी के सूत्र ने यह भी बताया कि फिलहाल जीतन राम मांझी वेट एंड वॉच की स्थिति में है। सूत्र के अनुसार मांझी यह भी देख रहे हैं कि कोऑर्डिनेशन कमिटी या महागठबंधन को लेकर अन्य घटक दल यानी आरएलएसपी और वीआईपी जैसी पार्टियों का क्या रुख होता है। सूत्र द्वारा बताया गया कि 10 जुलाई के बाद जीतन राम मांझी कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं।

तेजस्वी पर नाराजगी जाहिर कर चुके हैं मांझी
महागठबंधन को लेकर जितेंद्र मांझी की यह नाराजगी कोई नहीं है ऐसी बात भी नहीं है। महागठबंधन के सबसे बड़े दल आरजेडी के रुख को लेकर कई बार अपनी नाराजगी जता चुके हैं। जीतन राम मांझी तो यहां तक कह चुके हैं कि आरजेडी नेता और लालू यादव के पुत्र तेजस्वी यादव घटक दलों की बात ही नहीं सुनते। उन्होंने यह बात तब कही थी जब गोपालगंज तिहरे हत्याकांड को लेकर आरजेडी ने खूब हल्ला हंगामा किया था। बता दें कि इस कांड में जेडीयू विधायक का नाम सामने आने के बाद आरजेडी ने महागठबंधन में शामिल किसी दल को अपने धरना प्रदर्शन में शामिल नहीं किया था। तब माझी ने यह कहा था कि तेजस्वी किसी की नहीं सुनते जाहिर है मांझी की यह नाराजगी उन्हें कोई बड़ा कदम उठाने को मजबूर कर रही है। अब उनका अगला कदम क्या होगा यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।

RLSP के तीन सदस्यीय कमेटी ने आरजेडी प्रदेश अध्यक्ष से की मुलाकात
महागठबंधन में तो कोऑर्डिनेशन कमिटी नहीं बन पाई लेकिन राष्ट्रीय लोक समता पार्टी यानी आरएलएसपी के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने अपने पार्टी में 3 सदस्यीय कमेटी जरूर बना दी है। रालोसपा के 3 सदस्य कमेटी में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भूदेव चौधरी, प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष वीरेंद्र कुशवाहा और पार्टी के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष राजेश यादव शामिल है। पार्टी प्रमुख द्वारा बनाए गए। इस 3 सदस्य कमेटी के सदस्यों ने रविवार को आरजेडी के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह से मुलाकात की। इस दौरान महागठबंधन में कोआर्डिनेशन कमेटी और विधानसभा चुनाव की तैयारी को लेकर बातचीत की गई। पार्टी सूत्रों ने बताया कि इस मामले में आरजेडी का रुख टाल मटोल वाला ही रहा। अगर बात की जाए विकासशील इंसान पार्टी यानी वीआईपी की तो पार्टी प्रमुख मुकेश साहनी फिलहाल तो महागठबंधन के पक्ष में दिख रहे हैं, लेकिन रालोसपा, हम और वीआईपी की तिकड़ी महागठबंधन में फेमस हो चुकी है। कई बार यह तीनों दल मिलकर बैठक कर चुके हैं जिसमें ना तो आरजेडी को ना ही कांग्रेस को आमंत्रित किया गया था। अब मांझी और उपेंद्र कुशवाहा के रुख को देखकर ही मुकेश सहनी अपना रुख तय करेंगे ऐसा सत्ता के गलियारे में माना जा रहा है।

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