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मुनस्यारी-मिलम सड़क पर वैली ब्रिज टूट गया 

 देहरादून 

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में आज सोमवार को मुनस्यारी-मिलम सड़क पर वैली ब्रिज टूट गया। भारत-चीन सीमा पर एलएसी (Line of Actual Control) से 65 किमी की दूरी पर स्थित यह ब्रिज टूटा है। हादसा उस वक्त हुआ जब पोकलैंड मशीन लेकर जा रहा ट्राला ब्रिज के ऊपर से गुजर रहा था। इस पुल के टूटने से सीमांत में सेना के साथ ही 15 से अधिक गांवों का शेष दुनिया से सड़क संपर्क कट गया है।

सोमवार सुबह करीब नौ बजे मुनस्यारी-मिलम सड़क निर्माण के लिए एक ट्राला यूके-04/सीबी-5138 पोकलैंड मशीन लेकर जा रहा था। सेनरगाड़ नदी पर बना वैली ब्रिज इस ट्राले व पोकलैंड का भार सहन नहीं कर सका और भरभराकर गिर गया।  हादसे में ट्राला चालक अल्मोड़ा निवासी गोधन सिंह और पोकलैंड ऑपरेटर पंजाब निवासी लकविंदर सिंह गंभीर रूप से घायल हो गये। दोनों का सीएचसी मुनस्यारी में उपचार चल रहा है।

पुल टूटने से इन गांवों के लोगों की बढ़ी दिक्कत
वर्ष 2009में बीआरओ ने उच्च हिमालयी क्षेत्रों को सड़क संपर्क से जोड़ने के लिए सेनरगाड़ में वैली ब्रिज बनाया था। वैली ब्रिज टूटने से उच्च हिमालयी क्षेत्र स्थित धापा, लिलम, साई पोलो, बुई, पातो, जिमीघाट, कुरी जिमिया, मिलम, पाछू, गनघर, लास्पा, ल्वा, बुरफू, बिल्जू, रेलकोट सहित 15 से अधिक गांवों का सड़क संपर्क पूरी तरह कट गया है। ये गांव अलग-थलग पड़ गए हैं। 

18 टन की क्षमता के पुलपर चढ़ा दिया 26टन का पोकलैंड लदा ट्राला
 सेनरगाड़ में बने वैली ब्रिज की क्षमता महज 18टन की थी। बावजूद इसके उस पर आठ गुना अधिक भार का पोकलैंड लदा ट्राला चढ़ा दिया गया। नतीजा यह रहा कि पुल ट्राला, पोकलैंड समेत नदी में समा गया। इस पूरे घटनाक्रम में बीआरओ के अधिकारी कुछ भी कहने से बच रहे हैं। वर्ष 2009में बने इस वैली ब्रिज की एक माह पहले ही रिपेयरिंग की गई थी। मुनस्यारी-मिलम सड़क निर्माण को अंजाम तक पहुंचाने के लिए इस पुल की महत्वपूर्ण भूमिका थी। इसी पुल से होकर बीआरओ सड़क निर्माण की सामग्री मिलम पहुंचाता है। सोमवार सुबह पोकलैंड मशीन लेकर सेनरगाड़ पहुंचे ट्राले का वजन 26टन था, लेकिन ट्राले को 18टन भार क्षमता वाले पुल पर चढ़ाने की अनुमति दे दी गई। नतीजा यह रहा कि पुल ट्राले का भार नहीं सह सका और ट्राला, पोकलैंड समेत सेनरगाड़ में समा गया।  वैली ब्रिज टूटने से बीआरओ व मुनस्यारी-मिलम सड़क निर्माण की कार्यदाई कंपनी की मुश्किल बढ़ गई है। कोरोना के कारण हुए लॉकडाउन से तीन माह से अधिक समय तक सड़क निर्माण का कार्य रोकना पड़ा था। लॉकडाउन से छूट मिलते ही फिर से सड़क निर्माण का काम रफ्तार पकड़ने की उम्मीद थी। बीआरओ को मुनस्यारी से मिलम तक 58किमी सड़क निर्माण करना है। अभी तक 37किमी सड़क काट दी गई है। अब भी 21किमी सड़क का निर्माण होना शेष है। पुल टूटने से निर्माण सामग्री सहित मशीनरी आगे पहुंचाना बीआरओ के लिए मुश्किल हो गया है।  
 

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